
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ इस बार संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की सालाना बैठक में हिस्सा लेने के लिए अमेरिका जा रहे हैं। उनकी यह यात्रा 22 सितंबर 2025 से शुरू होगी। इस दौरान वे कई बैठकों में भाग लेंगे और कश्मीर मुद्दे को फिर से अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाने की कोशिश करेंगे।
ट्रंप से पहली सीधी भेंट
शहबाज शरीफ की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से यह पहली आधिकारिक मुलाकात होगी। यह बैठक पाकिस्तान के लिए खास इसलिए भी मानी जा रही है क्योंकि ठीक 100 दिन पहले ही पाकिस्तानी आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने ट्रंप से मुलाकात की थी। उस समय "ऑपरेशन सिंदूर" में पाकिस्तान की हार के बाद दोनों के बीच बातचीत हुई थी।
चुनिंदा मुस्लिम नेताओं संग बैठक
पाकिस्तान का विदेश कार्यालय बता रहा है कि शहबाज शरीफ, ट्रंप और कुछ चुनिंदा मुस्लिम नेताओं की एक विशेष बैठक में भी शामिल होंगे। इस मीटिंग का मकसद क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर विचार करना बताया गया है। पाकिस्तान इस मुलाकात को अपनी कूटनीतिक सफलता की तरह पेश कर रहा है।
कश्मीर को फिर बनाएंगे मुद्दा
शहबाज शरीफ ने साफ संकेत दिए हैं कि वे एक बार फिर संयुक्तराष्ट्र में कश्मीर मुद्दे को उठाएंगे। पाकिस्तान लंबे समय से इसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उछालकर भारत पर दबाव बनाने की कोशिश करता रहा है। भारत लगातार स्पष्ट कर चुका है कि पूरा जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और पाकिस्तान को अवैध कब्जा छोड़ना चाहिए।
इस्लामोफोबिया और आतंकवाद पर भी चर्चा
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, शरीफ संयुक्त राष्ट्र में आतंकवाद, इस्लामोफोबिया और वैश्विक शांति जैसे मुद्दों को भी छूएंगे। साथ ही, वे यह दावा करेंगे कि पाकिस्तान संघर्ष रोकने और वैश्विक समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
मध्यपूर्वकेघटनाक्रमोंकीपृष्ठभूमि
यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब हाल ही में इज़रायल ने कतर की राजधानी दोहा में हमास नेताओं को निशाना बनाकर बड़ा हमला किया था। इसमें हमास के पांच सदस्य और एक कतरी अधिकारी मारे गए थे। इसके बाद अरब लीग और इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) ने आपात बैठक बुलाकर इज़रायल से संबंधों की समीक्षा की थी। ट्रंप अब मुस्लिम नेताओं से इसी संदर्भ में मुलाकात कर रहे हैं।
भारत-पाक संबंधों पर बयान
अमेरिका यात्रा से पहले लंदन में प्रवासी पाकिस्तानियों को संबोधित करते हुए शहबाज शरीफ ने कहा कि कश्मीर मुद्दे के समाधान के बिना भारत-पाकिस्तान के बीच सामान्य संबंध संभव नहीं हैं। उन्होंने यह भी माना कि दोनों देशों ने चार युद्ध लड़े हैं जिनमें अरबों डॉलर खर्च हो गए, जबकि यह रकम जनता की भलाई पर लगाई जानी चाहिए थी।