
हिंदू पंचांग के अनुसार, वर्ष 2025 में अगस्त माह में शनिश्चरी अमावस्या का अत्यंत शुभ योग बन रहा है। यह दिन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होता है, बल्कि ज्योतिषीय रूप से भी इसका विशेष महत्व होता है, खासकर उन जातकों के लिए जो शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या से प्रभावित हैं। इस पावन अवसर पर विधिवत पूजन और उपाय करने से शनि दोषों से राहत मिलने की प्रबल संभावना होती है।
कब है अगस्त में शनिश्चरी अमावस्या?
अगस्त 2025 में अमावस्या तिथि शनिवार, 23 अगस्त को पड़ रही है। जब अमावस्या तिथि और शनिवार का संयोग बनता है, तब उसे शनिश्चरी अमावस्या कहा जाता है। यह संयोग अत्यंत दुर्लभ होता है और शनि ग्रह की कृपा प्राप्त करने का सर्वोत्तम अवसर माना जाता है।
शनिश्चरी अमावस्या का महत्व
शनि को न्याय का देवता माना जाता है, जो कर्मों के अनुसार फल देते हैं। यदि किसी की कुंडली में शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या चल रही हो, तो जीवन में अकारण बाधाएं, मानसिक तनाव, आर्थिक तंगी या स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। ऐसे में शनिश्चरी अमावस्या पर शनि पूजा, दान और व्रत का विशेष महत्व होता है। इस दिन श्रद्धा एवं नियमपूर्वक किए गए उपाय शनि की कुप्रभावों से राहत दिला सकते हैं।
क्या करें इस दिन?
पीपल के वृक्ष के नीचे दीपक जलाएं और "ॐ शं शनैश्चराय नमः" मंत्र का जाप करें।
काले तिल, काला वस्त्र, लोहे का दान करें।
शनि मंदिर में सरसों के तेल का दीपक चढ़ाएं।
जरूरतमंदों को भोजन व वस्त्र दान करें।
साढ़ेसाती और ढैय्या से राहत
जिन जातकों पर वर्तमान में शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या चल रही है, उनके लिए यह दिन अत्यंत लाभकारी हो सकता है। इस दिन किए गए कर्म, पूजा और उपाय भविष्य में आने वाले संकटों को टाल सकते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार कर सकते हैं।