लखनऊ। माघ मेला 2026 में शुक्रवार को वसंत पंचमी के दिन ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की तबियत बिगड गई। तेज बुखार और बदन दर्द के कारण वह सुबह पालकी से उतरे और अपनी वैनिटी वैन में चले गए। शिष्यों ने बताया कि सुबह से वह वैन से बाहर नहीं आए हैं। उन्हें तेज बुखार है।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद मौनी अमावस्या के दिन से ही प्रशासन द्वारा पालकी से स्नान करने जाने पर रोग लगाए जाने के बाद से अपने ही शिविर के बाहर पालकी पर धरने पर बैठे हुए थे। पिछले 5 दिनों से धरना दे रहे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की तबीयत शुक्रवार को अचानक बिगड़ गई।
पालकी पर धरना दे रहे थे अविमुक्तेश्वरानंद
पुलिस प्रशासन ने महाराज अविमुक्तेश्वरानंद की पालकी खिंचवाकर उनके शिवर के बाहर लाकर छोड़ दी। तभी से अविमुक्तेश्वरानंद पिछले 5 दिनों से उसी जगह पर शिविर के बाहर पालकी पर धरना दे रहे थे। पालकी से उतरकर वह स्नान ध्यान कर लेते थे। इसके बाद इस पालकी पर ही बैठे रहते थे। पालकी पर ही आराम भी करते थे।
मेला प्रशासन और शंकराचार्य के बीच विवाद बढ़ा
माघ मेला प्रशासन और शंकराचार्य के बीच विवाद बढ़ता ही जा रहा है। दो नोटिस मिलने के बाद और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शंकराचार्य होने को लेकर सवाल उठाए जाने के बाद उनके शिविर के जमीन को ही रद्द करने की बात कही गई है। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि क्यों ना उनकी जमीन का आवंटन ही रद्द कर दिया जाए? अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि जब तक प्रशासन माफी नहीं मांगता तब तक मैं स्नान नहीं करूंगा।
प्रशासन नोटिस-नोटिस खेल रहा है: अविमुक्तेश्वरानंद
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, प्रशासन नोटिस नोटिस खेल रहा है। अभी मेरा मौनी अमावस्या का स्नान अधूरा है, तो मैं वसंत पंचमी का स्नान कैसे कर सकता हूं? हालांकि दो नोटिस के बाद प्रयागराज मेला विकास प्राधिकरण ने भी इस मामले पर चुप्पी साध ली है। अखिलेश यादव के समर्थन करने के बाद स्वामी रामदेव ने भी गुरुवार को इस मामले पर बयान दिया था। संगम स्नान के बाद बाबा रामदेव ने कहा था कि जो अपने ही संतों अपने ही साधू संन्यासियों के ऊपर अभद्र टिप्पणी करता हो, मैं उसे संत नहीं मानता।
मेले में अपना एजेंडा लेकर आना अच्छा नहीं: योगी
कुछ लोग माघ मेले में अपना अपना एजेंडा लेकर आते हैं। यह अच्छी बात नहीं है। इससे सनातन धर्म कमजोर होता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का नाम लिए बिना कहा कि किसी परंपरा को बाधित करने का किसी भी साधु संन्यासी को हक नहीं है। ऐसे तमाम कालनेमी घूम रहे हैं, जिन्हें पहचानना जरूरी है। जोकि धर्म की आड़ में सनातन धर्म को कमजोर करने की साजिश रच रहे हैं।
डिप्टी सीएम ने स्नान करने की अपील की
इस मामले पर डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने भी आजमगढ़ में बयान दिया था कि ज्योतिष पीठाधीश्वर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के चरणों में मैं प्रणाम करता हूं। मैं उनसे प्रार्थना करता हूं कि वह स्नान कर इस विषय का पटाक्षेप करें। इन बयानों के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी योगीराज शैलेंद्र ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सवाल किया था। शंकराचार्य के मीडिया ग्रुप में एक वीडियो जारी कर उन्होंने योगी आदित्यनाथ से सवाल किया था कि कालनेमि आखिर कौन है?