प्रयागराज में माघ मेले के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़ा मामला अब सिर्फ धार्मिक नहीं रह गया है। यह मुद्दा तेजी से राजनीतिक रंग ले चुका है। समाजवादी पार्टी ने इसे सीधे तौर पर सरकार से जोड़ते हुए बड़ा हमला बोला है। अखिलेश यादव और उनके चाचा शिवपाल यादव ने एक के बाद एक बयान देकर योगी सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है। इस पूरे मामले ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है।
शिवपाल यादव का पहला हमला
सबसे पहले जसवंतनगर से विधायक शिवपाल यादव ने मोर्चा संभाला। उन्होंने प्रयागराज की घटना को सरकार की सोच और कार्यशैली से जोड़ दिया। शिवपाल ने कहा कि जो सरकार हर मंच पर धर्म और सनातन की बात करती है वही आज संतों की आवाज से डरती नजर आ रही है। उन्होंने प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा कि अब सवाल पूछना अपराध बनता जा रहा है और असहमति को दबाया जा रहा है। उनके बयान को योगी सरकार के संतों वाले चेहरे पर सीधा वार माना जा रहा है।
अखिलेश यादव का तीखा प्रहार
शिवपाल के बाद अखिलेश यादव ने भी सरकार पर जोरदार हमला बोला। कन्नौज से सांसद अखिलेश ने कहा कि सत्ता और धन के अलावा सरकार किसी की नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की सोच बांटने वाली है। अखिलेश ने यह भी कहा कि इतिहास गवाह है कि अहंकार का अंत तय होता है। उनके इस बयान ने सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और विपक्ष को नया मुद्दा मिल गया है।
शंकराचार्य शिविर के बाहर हंगामा
इस विवाद ने तब और तूल पकड़ लिया जब शंकराचार्य के शिविर के बाहर मारपीट की खबर सामने आई। माघ मेले में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान कुछ लोगों द्वारा वीडियो बनाए जाने को लेकर विवाद हुआ। बात इतनी बढ़ गई कि हाथापाई तक पहुंच गई। बाद में पुलिस ने किसी तरह स्थिति को संभाला। इस घटना के बाद प्रशासन की तैयारी और मेले की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं।
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सरकार पर उठ रहे बड़े सवाल
अब सियासी गलियारों में यह सवाल तेजी से गूंज रहा है कि जो सरकार खुद को संतों की सरकार बताती है उसी दौर में शंकराचार्य जैसे बड़े धार्मिक चेहरे पर कानूनी कार्रवाई क्यों हुई। समाजवादी पार्टी इसी सवाल को बार बार उठा रही है। अखिलेश और शिवपाल का कहना है कि साधु संतों का अपमान किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जाएगा। यह मुद्दा अब आम लोगों के बीच भी चर्चा का विषय बनता जा रहा है।
आगे क्या बढ़ेंगी मुश्किलें
कुल मिलाकर प्रयागराज का यह मामला अब एक घटना नहीं बल्कि सरकार और विपक्ष के बीच बड़ी सियासी टकराव बन चुका है। चाचा भतीजे की जोड़ी खुलकर मैदान में उतर चुकी है और सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ रही। सवाल यही है कि क्या यह मुद्दा योगी सरकार के लिए नई परेशानी बनेगा या फिर सरकार इसे संभाल लेगी। आने वाले दिनों में इस विवाद पर राजनीति और तेज होने के संकेत साफ दिखाई दे रहे हैं।