ज्योतिष पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती अपने गौमाता जनजागरण अभियान के तहत उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के बड़ौत पहुंचे। यहां कोताना रोड स्थित सर्व समाज उत्थान समिति के कार्यालय में उनका जोरदार स्वागत किया गया। लोगों ने पुष्प वर्षा कर उनका अभिनंदन किया और उनके विचार सुने।
गौ संरक्षण पर दिया जोर
शंकराचार्य ने कहा कि गौमाता केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं हैं, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत आधारशिला भी हैं। उन्होंने लोगों से गौ संरक्षण के लिए आगे आने की अपील की और कहा कि गायों की रक्षा करना समाज और संस्कृति दोनों के लिए जरूरी है।
राष्ट्रमाता का दर्जा देने की मांग
उन्होंने कहा कि गौमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने के लिए वे प्रदेशभर में जनजागरण अभियान चला रहे हैं। उनके मुताबिक, अब तक वह करीब 200 विधानसभा क्षेत्रों में जाकर लोगों से संवाद कर चुके हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि चुनाव में ऐसे मुद्दों को प्राथमिकता दें और गौ संरक्षण के लिए जनप्रतिनिधियों पर दबाव बनाएं।
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राम मंदिर ट्रस्ट पर सवाल
राम मंदिर ट्रस्ट को लेकर पूछे गए सवाल पर शंकराचार्य ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि मंदिर से जुड़ी अनियमितताओं की चर्चा आज हो रही है, लेकिन उनकी नजर में इसकी आशंका पहले से दिखाई दे रही थी। उन्होंने कहा कि जब मंदिर निर्माण की प्रक्रिया शुरू हुई थी, तब कई अनुभवी धार्मिक नेताओं और संस्थाओं को निर्णय प्रक्रिया से दूर रखा गया था।
ट्रस्ट गठन पर जताई नाराजगी
शंकराचार्य ने कहा कि मंदिर निर्माण से जुड़े मामलों में चार शंकराचार्यों और 13 अखाड़ों के प्रमुखों की भूमिका हो सकती थी, लेकिन उन्हें शामिल नहीं किया गया। उनके अनुसार, ट्रस्ट में कुछ चुनिंदा लोगों को जगह दी गई, जिससे कई सवाल खड़े हुए। उन्होंने कहा कि उसी समय उन्हें लगा था कि आगे चलकर विवाद और आरोप सामने आ सकते हैं।
सनातन और राजनीति पर राय
सनातन परंपरा और राजनीतिक हिंदुत्व को लेकर पूछे गए सवाल पर शंकराचार्य ने कहा कि दोनों विषयों को अलग-अलग नजरिए से समझने की जरूरत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका अभियान किसी विवाद को बढ़ावा देने के लिए नहीं है। उनका उद्देश्य समाज को जागरूक करना, भारतीय संस्कृति की रक्षा करना और गौ संरक्षण जैसे मुद्दों पर लोगों को एकजुट करना है।