शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर लगे यौन शोषण के आरोपों के बीच देशभर में बहस तेज हो गई है। इसी कड़ी में राजधानी भोपाल के झरनेश्वर महादेव मंदिर में उनके समर्थन में हवन और पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया। समर्थकों ने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे साजिश करार दिया और उत्तर प्रदेश सरकार से निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। आयोजन में राजनीतिक और धार्मिक हस्तियां भी शामिल रहीं।
झरनेश्वर महादेव मंदिर में सामूहिक हवन
भोपाल स्थित झरनेश्वर महादेव मंदिर में बड़ी संख्या में साधु-संतों और श्रद्धालुओं ने एकत्र होकर हवन किया। इस दौरान वैदिक मंत्रोच्चार के साथ आहुति दी गई और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में आवाज बुलंद की गई। आयोजन में कांग्रेस नेता अमित शर्मा सहित कई पुजारी और स्थानीय नागरिक मौजूद रहे। समर्थकों ने इसे “आस्था की रक्षा” का प्रयास बताया।
‘झूठे केस में फंसाने’ का आरोप
कार्यक्रम में मौजूद नेताओं और संतों ने कहा कि शंकराचार्य को झूठे और बेबुनियाद आरोपों में फंसाया जा रहा है। उनका दावा है कि अब तक इस तरह के आरोप कभी सामने नहीं आए थे और अचानक लगे आरोपों के पीछे साजिश हो सकती है। वक्ताओं ने कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए ताकि सच सामने आ सके।
योगी सरकार की सद्बुद्धि के लिए प्रार्थना
हवन के दौरान विशेष रूप से उत्तर प्रदेश सरकार के लिए ‘सद्बुद्धि’ की प्रार्थना की गई। समर्थकों का कहना है कि प्रशासन को किसी दबाव में आए बिना निष्पक्ष कार्रवाई करनी चाहिए। आयोजन के दौरान यह भी कहा गया कि धार्मिक गुरुओं की गरिमा बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है।
मध्य प्रदेश से गहरा जुड़ाव
अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का मध्य प्रदेश से विशेष संबंध रहा है। नरसिंहपुर जिले के गोटेगांव स्थित झोतेश्वर आश्रम से उनका आध्यात्मिक नाता जुड़ा है। उनके गुरु स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती भी इसी आश्रम में रहे थे। समय-समय पर शंकराचार्य का यहां आगमन होता रहा है। भोपाल के झरनेश्वर महादेव मंदिर में भी वे कई बार प्रवास कर चुके हैं, जिससे प्रदेश में उनके अनुयायियों की संख्या बड़ी मानी जाती है।
आगे क्या?
आरोपों और समर्थन के बीच यह मामला अब सामाजिक और राजनीतिक बहस का रूप ले चुका है। एक ओर जहां जांच की मांग हो रही है, वहीं समर्थक इसे संत पर आस्था का प्रश्न बता रहे हैं। आने वाले दिनों में जांच और प्रशासनिक कदम इस पूरे घटनाक्रम की दिशा तय करेंगे।