
शरद पूर्णिमा का पर्व हिन्दू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह दिन न केवल आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष होता है, बल्कि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार भी यह चंद्रमा की कृपा प्राप्त करने का सर्वोत्तम समय होता है। 2025 में शरद पूर्णिमा 13 अक्टूबर को मनाई जाएगी। इस दिन चंद्रमा सोलह कलाओं से पूर्ण होता है और इसकी किरणों से अमृत तुल्य ऊर्जा पृथ्वी पर बरसती है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन किए गए उपाय और मंत्र जाप से चंद्र दोष का शमन होता है और जीवन में सुख, समृद्धि तथा मानसिक शांति प्राप्त होती है....शरद पूर्णिमा की रात खीर बनाकर चांदनी में रखने की परंपरा है, जिससे उसमें चंद्रमा की सकारात्मक ऊर्जा समाहित हो जाती है। इस खीर का सेवन करने से रोगों में राहत और मानसिक तनाव में कमी आती है।
राशि अनुसार उपाय
मेष: इस दिन चंद्रमा को कच्चा दूध अर्पित करें और "ॐ चं चन्द्राय नमः" मंत्र का 108 बार जाप करें।
वृषभ: चंद्रमा को मिश्री मिले दूध से अर्घ्य दें और सफेद वस्त्र दान करें।
मिथुन: चंद्र मंत्र के साथ ध्यान करें और गरीब बच्चों में मिठाई बांटें।
कर्क: चंद्रमा आपकी राशि का स्वामी है, अतः रात्रि में ध्यान करें और जल में केसर डालकर अर्घ्य दें।
सिंह: पूर्णिमा की रात चंद्रमा की रोशनी में बैठकर ध्यान करें और मानसिक शांति के लिए मंत्र जाप करें।
कन्या: चावल और चीनी का दान करें, "ॐ सोमाय नमः" मंत्र का जाप करें।
तुला: रात्रि में दूध से स्नान कर चंद्र देव को अर्घ्य दें और सफेद पुष्प चढ़ाएं।
वृश्चिक: चंद्रमा को जल चढ़ाएं और मीठे जल का दान करें।
धनु: खीर बनाकर गरीबों में बांटें और चंद्रमा के दर्शन करें।
मकर: मन की शांति के लिए चंद्र मंत्र का जाप करें और वृद्धों को भोजन कराएं।
कुंभ: सफेद वस्त्र धारण कर रात्रि में ध्यान करें और चंद्रमा को प्रणाम करें।
मीन: चांदनी में बैठकर ध्यान लगाएं और परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना करें।
चंद्र दोष को शांत
शरद पूर्णिमा पर की गई यह साधना न केवल चंद्र दोष को शांत करती है, बल्कि मन को स्थिरता, सौम्यता और मानसिक संतुलन प्रदान करती है। इसलिए इस दिन को आध्यात्मिक जागरूकता के साथ जरूर मनाएं।