
शारदीय नवरात्रि का पर्व शक्ति की उपासना का सबसे पावन समय माना जाता है। इस दौरान मां दुर्गा के नौ रूपों की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना की जाती है। नवरात्रि का आरंभ घटस्थापना से होता है, जिसे शुभ मुहूर्त और सही दिशा में करना बेहद आवश्यक होता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार यदि घटस्थापना सही दिशा में की जाए, तो साधक को विशेष फल और मां दुर्गा की कृपा सहज रूप से प्राप्त होती है।
घटस्थापना की सही दिशा क्या है?
वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तर-पूर्व दिशा (ईशान कोण) को पूजा-पाठ और घटस्थापना के लिए सबसे पवित्र दिशा माना गया है। यह दिशा आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर मानी जाती है और यहां घट की स्थापना करने से सकारात्मकता घर में प्रवेश करती है। यदि किसी कारणवश यह दिशा उपलब्ध न हो, तो पूर्व दिशा भी एक उत्तम विकल्प है।
घटस्थापना के समय ध्यान रखें ये बातें
साफ-सफाई: जहां घटस्थापना की जा रही है, उस स्थान को शुद्ध और स्वच्छ रखना बहुत ज़रूरी है। वहां रोज धूप-दीप जलाएं। सामग्री की पवित्रता: घट में रखने वाले जल, कलश, आम के पत्ते, नारियल आदि को शुद्ध जल से धोकर ही प्रयोग करें। मिट्टी और जौ: घटस्थापना के दौरान मिट्टी में जौ बोना शुभ माना जाता है। इसका अंकुरण सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि का प्रतीक होता है। मुहूर्त का पालन: घटस्थापना हमेशा शुभ मुहूर्त में करनी चाहिए। इसके लिए पंडित से परामर्श लें या पंचांग का अध्ययन करें।
वास्तु के अनुसार घटस्थापना के लाभ
वास्तु के अनुसार घटस्थापना की सही दिशा चुनने से घर में शांति, समृद्धि और सुख-शांति बनी रहती है। यह नकारात्मक ऊर्जा को दूर करती है और मां दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है। साथ ही, साधना और उपासना में एकाग्रता बनी रहती है, जिससे आत्मिक शांति और मानसिक बल प्राप्त होता है। इस शारदीय नवरात्रि पर यदि आप वास्तु अनुसार घटस्थापना करें, तो निश्चित रूप से आपको मां दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होगी और आपका घर सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा से भर जाएगा।