ग्रेटर नोएडा की शारदा यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाली बीडीएस सेकंड ईयर की छात्रा ज्योति शर्मा ने शुक्रवार शाम (18 जुलाई 2025) आत्महत्या कर ली. वह यूनिवर्सिटी के मंडेला गर्ल्स हॉस्टल में रह रही थी. छात्रा के कमरे से सुसाइड नोट बरामद हुआ है, जिसमें दो प्रोफेसरों महेंद्र सर और शार्ग मैम पर मानसिक उत्पीड़न और बार-बार अपमान करने का आरोप लगाया गया है. पुलिस ने इन दोनों को गिरफ्तार कर लिया है.
क्या हुआ उस दिन?
हरियाणा के गुरुग्राम की रहने वाली 21 साल की ज्योति ने हॉस्टल के कमरे में पंखे से फंदा लगाकर जान दे दी. जब पुलिस और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची, तब कमरे से एक सुसाइड नोट मिल. उसमें ज्योति ने लिखा था, “अगर मेरी मौत होती है तो इसके लिए पीसीपी और डेंटल मैटेरियल्स के टीचर जिम्मेदार होंगे. महेंद्र सर और शार्ग मैम मेरी मानसिक स्थिति बिगाड़ते रहे हैं. मैं लंबे समय से डिप्रेशन में हूं और अब नहीं सह पा रही. उन्हें जेल जाना चाहिए.” नोट में यह भी लिखा गया था कि प्रोफेसर उसे फेल करने और फर्जी हस्ताक्षर का आरोप लगाकर परेशान कर रहे थे.
पुलिस ने क्या किया?
पुलिस ने IPC की धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) के तहत केस दर्ज कर लिया है और दोनों आरोपित प्रोफेसरों को गिरफ्तार कर लिया है. एडीसीपी सुधीर कुमार ने बताया कि जांच शुरू हो गई है और साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं. यूनिवर्सिटी प्रशासन को भी जांच में सहयोग के लिए कहा गया है.
परिवार और छात्रों का विरोध
ज्योति की मौत की खबर फैलते ही यूनिवर्सिटी में हंगामा शुरू हो गया. छात्र-छात्राओं और परिजनों ने यूनिवर्सिटी के बाहर धरना प्रदर्शन किया. ज्योति की मां सुनीता और भाई मौके पर पहुंच गए. पिता रमेश जांगड़ा ने यूनिवर्सिटी के कई स्टाफ सदस्यों और प्रोफेसरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है. उन्होंने आरोप लगाया कि बिना पुलिस और परिजनों को बताए, यूनिवर्सिटी प्रशासन ने शव को फंदे से उतार कर अस्पताल भेज दिया, जो नियमों के खिलाफ है.
छात्रों ने यूनिवर्सिटी पर पढ़ाई का अत्यधिक दबाव और मानसिक तनाव देने का आरोप लगाया. कुछ छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने उन्हें प्रदर्शन से रोकने के लिए लाठीचार्ज किया, हालांकि पुलिस ने इस दावे से इनकार किया है.
यूनिवर्सिटी का बयान
शारदा यूनिवर्सिटी के पीआरओ डॉ. अजीत कुमार ने कहा "हम इस दुखद घटना से बहुत दुखी हैं और ज्योति के परिवार के प्रति हमारी गहरी संवेदना है. दोनों आरोपी प्रोफेसरों को निलंबित कर दिया गया है. मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक उच्च स्तरीय आंतरिक कमेटी बनाई गई है. दोषी कोई भी हो, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी."
यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति पी.के. गुप्ता ने भी भरोसा दिलाया कि पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और छात्रों की भलाई के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे.
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि उच्च शिक्षा संस्थानों में छात्रों की मानसिक सेहत और शिक्षकों का व्यवहार कैसा होना चाहिए? सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा जोर पकड़ रहा है. लोग निष्पक्ष जांच और सख्त सजा की मांग कर रहे हैं.
फिलहाल, पुलिस सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल सबूतों की जांच कर रही है. यूनिवर्सिटी का माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है और प्रशासन पर अब इस मामले को पारदर्शी तरीके से सुलझाने का दबाव है.