दतिया। शारदीय नवरात्रि 2025 के पावन अवसर पर दतिया का खैरी वाली माता मंदिर श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। मां का यह मंदिर अपनी अनूठी मान्यता और रहस्यमयी स्वरूप के लिए प्रसिद्ध है। यहां मां दिन में तीन अलग-अलग रूपों में दर्शन देती हैं, जिसे देखने हजारों भक्त उमड़ते हैं।
मंदिर का इतिहास
दतिया ‘माई की नगरी’ के नाम से जाना जाता है। यहां स्थित खैरी वाली माता मंदिर का निर्माण महाराजा वीरसिंह जू देव ने वर्ष 1658 में करवाया था। उस समय इस क्षेत्र में खैर के वृक्षों का विशाल जंगल था, जिससे इस मंदिर का नाम ‘खैरी वाली माता’ पड़ा। माना जाता है कि राजा को देवी ने स्वप्न में दर्शन देकर खैरागढ़ में स्थापना का आदेश दिया था। तभी से मां यहां विराजमान हैं।
तीन रूपों में दर्शन
इस मंदिर की विशेषता है कि देवी सुबह बाल रूप, दोपहर में युवा रूप और शाम को वृद्धा रूप में दिखाई देती हैं। लगभग 50 सीढ़ियां चढ़ने के बाद भक्त मां के दरबार तक पहुंचते हैं।
भक्तों की आस्था और आयोजन
नवरात्रि में यहां 50 से 60 हजार श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। मंदिर के पुजारी और भक्त बताते हैं कि मां सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूर्ण करती हैं। सप्तमी के दिन यहां विशाल भंडारे का आयोजन भी होता है।
यह मंदिर दतिया से करीब 7 किलोमीटर की दूरी पर मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की सीमा के पास स्थित है और आस्था का प्रमुख केंद्र है।