Shardiya Navratri Kalash Sthapana Muhurat: हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्र का विशेष महत्व है। यह पर्व मां दुर्गा की आराधना के लिए समर्पित है। हर साल आश्विन महीने के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नौ दिनों तक चलने वाले इस उत्सव की शुरुआत होती है। नवरात्र के पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। इसी दिन घरों और मंदिरों में घटस्थापना करके माता का आह्वान किया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि विधि-विधान से पूजा और व्रत करने से मां दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है। इस बार नवरात्र के पहले दिन कई शुभ योग भी बन रहे हैं। आइए जानते हैं कलश स्थापना का शुभ समय, पूजा की विधि और मां शैलपुत्री की आराधना से जुड़ी जरूरी बातें।
शारदीय नवरात्र 2026 कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
सुबह का मुहूर्त: सुबह 6:19 बजे से 10:12 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक
नवरात्र के पहले दिन के शुभ चौघड़िया मुहूर्त
चर मुहूर्त: सुबह 7:33 बजे से 9:00 बजे तक
लाभ मुहूर्त: सुबह 9:00 बजे से 10:28 बजे तक
अमृत मुहूर्त: सुबह 10:28 बजे से 11:56 बजे तक
शुभ मुहूर्त: दोपहर 1:24 बजे से 2:51 बजे तक
शारदीय नवरात्र 2026 में राहुकाल का समय
द्रिक पंचांग के मुताबिक, 11 अक्टूबर 2026 को राहुकाल शाम 4:34 बजे से 6:01 बजे तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस अवधि में शुभ कार्यों की शुरुआत करने से परहेज किया जाता है।
शारदीय नवरात्र 2026: कलश स्थापना की विधि
नवरात्र के पहले दिन घटस्थापना के साथ नौ दिनों की पूजा का आरंभ होता है। घर पर कलश स्थापित करने के लिए सुबह स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनें। इसके बाद पूजा स्थल को साफ करके वहां लकड़ी की चौकी रखें और उस पर लाल या पीला कपड़ा बिछा दें। चौकी पर मां दुर्गा की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें। पूजा शुरू करने से पहले भगवान गणेश का स्मरण करें। इसके बाद हाथ में जल, फूल और अक्षत लेकर मां दुर्गा का ध्यान करें और व्रत रखने का संकल्प लें।
अब कलश स्थापना की तैयारी करें। इसके लिए साफ मिट्टी में जौ डालकर उसे चौकी के पास किसी पात्र में रखें। मिट्टी या धातु के कलश पर रोली अथवा स्वास्तिक का चिह्न बनाएं और उसके गले में कलावा बांधें। कलश में स्वच्छ जल और गंगाजल डालें। परंपरा के अनुसार इसमें सुपारी, सिक्का, लौंग, दूर्वा और हल्दी की गांठ भी रख सकते हैं।
इसके बाद कलश के मुख पर आम या अशोक के पत्ते लगाएं और उसे ढकने के लिए ढक्कन रखें। ढक्कन पर चावल या गेहूं रखा जा सकता है। यदि नारियल स्थापित करने की परंपरा का पालन करते हैं, तो नारियल पर स्वास्तिक बनाकर उसे लाल कपड़े में लपेटें और कलावे से बांधकर कलश के ऊपर रखें।
कलश स्थापना के बाद मां दुर्गा और मां शैलपुत्री की पूजा करें। माता को फूल, माला, रोली, कुमकुम, अक्षत और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें। इसके बाद फल और मिठाई का भोग लगाएं। घी का दीपक और धूप जलाकर मंत्रों का जाप करें। पूजा के अंत में मां की आरती करें और जाने-अनजाने में हुई गलतियों के लिए क्षमा मांगें।
मां शैलपुत्री की पूजा कैसे करें?
नवरात्र के पहले दिन मां शैलपुत्री की उपासना का विधान है। माता को सफेद रंग प्रिय माना जाता है, इसलिए उनकी पूजा में सफेद फूल और सफेद रंग की मिठाई अर्पित कर सकते हैं। इसके साथ ही माता को कुमकुम, सिंदूर, अक्षत और फूलों की माला चढ़ाएं। पूजा के समय घी का दीपक जलाकर मां शैलपुत्री का ध्यान करें। श्रद्धा के साथ उनके मंत्र का जाप करें और दुर्गा स्तोत्र का पाठ करें। इसके बाद माता को भोग लगाकर आरती करें। पूजा पूरी होने पर परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करें।
मां शैलपुत्री की आराधना के दौरान मन को शांत रखें और पूरी श्रद्धा से पूजा करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, नवरात्र के पहले दिन माता की उपासना करने से भक्तों को आत्मबल, सुख और सकारात्मक ऊर्जा का आशीर्वाद मिलता है।
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मां शैलपुत्री के मंत्र
ऊं देवी शैलपुत्र्यै नमः
या देवी सर्वभूतेषु मां शैलपुत्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
ऊं ऐं ह्रीं क्लीं शैलपुत्र्यै नमः