
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के कुछ उत्पादों पर 50% तक का नया टैरिफ (आयात शुल्क) लगा दिया है. इससे भारत के सामने व्यापार और कूटनीति, दोनों क्षेत्रों में नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं. इस मुद्दे पर आज शाम 4 बजे संसद भवन एनेक्सी में विदेश मामलों की संसदीय समिति की अहम बैठक होगी. बैठक की अध्यक्षता कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और अनुभवी कूटनीतिज्ञ शशि थरूर करेंगे. इसमें विदेश मंत्रालय और वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारी मौजूदा हालात, टैरिफ के असर और आगे की रणनीति पर जानकारी देंगे.
थरूर की खास भूमिका
शशि थरूर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का पक्ष मजबूती से रखने के लिए जाने जाते हैं. हाल ही में “ऑपरेशन सिंदूर” के दौरान भी उन्होंने कई देशों में भारत के हितों की रक्षा करते हुए बेहतरीन कूटनीति दिखाई थी. ऐसे में उम्मीद है कि इस टैरिफ विवाद में भी वो भारत की रणनीति तय करने में अहम योगदान देंगे.
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बता दें कि यह समिति विदेश नीति, अंतरराष्ट्रीय व्यापार, राजनयिक संबंध और विदेश में भारतीय हितों की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सरकार को सुझाव देती है. ज़रूरत पड़ने पर यह सरकार को नीति बदलने की सिफारिश भी कर सकती है.
भारत की तैयारी क्या है?
अमेरिकी टैरिफ का असर खासतौर पर उन सेक्टरों पर पड़ेगा जहां अमेरिका भारत का बड़ा बाजार है. इसे देखते हुए वाणिज्य मंत्रालय वैकल्पिक बाजार खोजने और अन्य देशों के साथ नए व्यापार समझौते करने की योजना पर काम कर रहा है. विदेश मंत्रालय इन वार्ताओं को कूटनीतिक समर्थन देगा, ताकि वो केवल व्यापार तक सीमित न रहें बल्कि रणनीतिक साझेदारी में बदल सकें.
गौर करने वाली बात है कि भले ही शशि थरूर विपक्ष के नेता हैं, लेकिन विदेश नीति के मामलों में वो कई बार सरकार के साथ मिलकर काम कर चुके हैं. यही वजह है कि उनकी अध्यक्षता वाली इस समिति की सिफारिशों को गंभीरता से लिया जाता है. बैठक में टैरिफ के जवाबी कदमों के साथ-साथ अमेरिका के साथ लंबे समय तक चलने वाले व्यापार और कूटनीतिक रिश्तों की दिशा पर भी चर्चा होगी.