देश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर), चुनाव आयोग और कथित सत्ता परिवर्तन की चर्चा के बीच कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा कि भारत की तुलना बांग्लादेश या फ्रांस से करना उचित नहीं है। थरूर के मुताबिक, विपक्ष की मांग सत्ता परिवर्तन की साजिश रचना नहीं, बल्कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना है। इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी और विपक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की मांग
समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में शशि थरूर ने कहा कि ‘रिजीम चेंज’ यानी सत्ता परिवर्तन जैसे शब्दों को गलत संदर्भ में पेश करने का कोई फायदा नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी चिंता मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने को लेकर है। थरूर के अनुसार, इस प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं और इसे रद्द करने की मांग की जा रही है। उन्होंने इसे संवैधानिक विषय बताते हुए कहा कि इसका सरकार गिराने की किसी कोशिश से संबंध नहीं है।
लोकतांत्रिक संस्थाओं की जवाबदेही पर जोर
कांग्रेस सांसद ने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा करना देश के नागरिकों का अधिकार है। उन्होंने चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं से अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन संविधान के अनुरूप करने की अपील की। थरूर ने स्पष्ट किया कि उनका सवाल संस्थाओं के अस्तित्व को चुनौती देने के लिए नहीं, बल्कि उनके कामकाज और व्यवहार को लेकर है। उनके मुताबिक, लोकतंत्र में चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण है।
प्रशांत भूषण और वायरल वीडियो से बढ़ा विवाद
यह विवाद उस समय तेज हुआ, जब वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण के कथित सत्ता परिवर्तन संबंधी बयान और नेहा बोरा का एक वीडियो चर्चा में आया। वीडियो में बांग्लादेश में हुए आंदोलनों का संदर्भ दिए जाने की बात सामने आई। इसके बाद भाजपा ने इन बयानों को लेकर विपक्ष पर सवाल उठाए। हालांकि, अलग-अलग व्यक्तियों के बयानों और उनके संदर्भों को समझना जरूरी है। किसी बयान के आधार पर व्यापक साजिश का निष्कर्ष निकालने के लिए ठोस प्रमाण आवश्यक हैं।
किरेन रिजिजू ने विपक्ष पर लगाए आरोप
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने इस विवाद पर विपक्ष को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत-विरोधी समूहों और कुछ राजनीतिक नेताओं ने युवाओं को भड़काने तथा देश में हिंसा फैलाने की योजना बनाई थी। उन्होंने बांग्लादेश की हिंसक घटनाओं और फ्रांस में हुए दंगों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत में सत्ता परिवर्तन केवल चुनाव के जरिए हो सकता है। रिजिजू ने अपने बयान में जॉर्ज सोरोस का भी उल्लेख किया। इस तरह एसआईआर, मतदाता सूची और चुनाव आयोग से जुड़ा मुद्दा अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का विषय बन गया है।