Sheetal Devi Asian Para Games : भारत की पैरा तीरंदाज शीतल देवी ने एशियन पैरा गेम्स में अपने शानदार प्रदर्शन से हर किसी का ध्यान खींचा है। उन्होंने इस प्रतियोगिता में दो गोल्ड और एक सिल्वर मेडल अपने नाम किया। उनकी यह कामयाबी सिर्फ मेडल तक सीमित नहीं रही, बल्कि उन्होंने अपने खेल से नए रिकॉर्ड भी बनाए। शीतल ने दिखा दिया कि अगर मेहनत और हौसला साथ हो, तो बड़ी से बड़ी मंजिल हासिल की जा सकती है।
बिना हाथों के निशाने पर लगाती हैं तीर
शीतल देवी की कहानी इसलिए भी खास है, क्योंकि उनका जन्म बिना हाथों के हुआ था। लेकिन उन्होंने इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। वह अपने पैरों की मदद से धनुष संभालती हैं और कंधे व जबड़े की मदद से डोरी खींचकर तीर चलाती हैं। उनका यह अंदाज लोगों को हैरान करता है। बचपन से ही उन्होंने अपने रोजमर्रा के काम पैरों से करना सीखा और आगे चलकर इसी हिम्मत को अपनी पहचान बना लिया।
एक ही दिन में दो गोल्ड जीतकर किया कमाल
शीतल ने एशियन पैरा गेम्स में एक ही दिन दो गोल्ड मेडल जीतकर शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने व्यक्तिगत कंपाउंड स्पर्धा में सिंगापुर की खिलाड़ी को हराकर गोल्ड जीता। वहीं, मिश्रित टीम स्पर्धा में तोमन कुमार के साथ मिलकर भी गोल्ड अपने नाम किया। खास बात यह रही कि व्यक्तिगत फाइनल में शुरुआत में पीछे रहने के बावजूद शीतल ने जबरदस्त वापसी की और मुकाबला जीत लिया।
विश्व रिकॉर्ड की बराबरी और नए रिकॉर्ड
शीतल ने महिलाओं की कंपाउंड तीरंदाजी की शुरुआती राउंड में 720 में से 704 अंक हासिल किए। इसके साथ ही उन्होंने विश्व रिकॉर्ड की बराबरी की और अपना पुराना एशियाई रिकॉर्ड भी पीछे छोड़ दिया। इतना ही नहीं, तोमन कुमार के साथ मिश्रित टीम में 1402 अंक बनाकर उन्होंने नया विश्व रिकॉर्ड भी बनाया। उनका यह प्रदर्शन उनकी लगातार मेहनत और शानदार निशानेबाजी का सबूत है।
इसे भी पढ़ें : 28वें दिन बॉक्स ऑफिस पर सुस्त पड़ी सिद्धार्थ-तमन्ना की 'द ववन', कमाई देखकर लगेगा झटका
शीतल की जीत से देश को मिली नई प्रेरणा
शीतल देवी की सफलता उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा है, जो अपने सपनों को पूरा करना चाहते हैं। उन्होंने यह साबित किया कि इंसान की पहचान उसकी कमियों से नहीं, बल्कि उसकी मेहनत और हौसले से होती है। आज शीतल की जीत पर देश गर्व कर रहा है। उनकी कहानी आने वाले खिलाड़ियों को भी आगे बढ़ने और अपने लक्ष्य पर ध्यान देने की प्रेरणा देती रहेगी।