
कहते हैं जब हिम्मत की आवाज दिल से आती है, तो किस्मत भी झुक जाती है. हरियाणा की बेटी शेफाली वर्मा ने यही साबित कर दिखाया. कभी टीम से बाहर कर दी गई यह लड़की आज वर्ल्ड कप की ‘हीरो’ बन गई है. 21 साल की उम्र में ‘लेडी सहवाग’ ने वर्ल्ड कप फाइनल में ऐसा प्रदर्शन किया जिसने पूरे हिंदुस्तान का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया. साउथ अफ्रीका के खिलाफ फाइनल में शेफाली ने 87 रन और 2 विकेट लेकर टीम इंडिया को पहला वनडे वर्ल्ड कप जिताया.
हरियाणा की छोरी की अनोखी कहानी
शेफाली वर्मा हरियाणा के रोहतक की रहने वाली हैं. उनके पिता संजय वर्मा, जो पेशे से ज्वेलर हैं, खुद क्रिकेट के बड़े शौकीन थे. उन्होंने अपनी बेटी में वही जुनून देखा, लेकिन शहर में लड़कियों के लिए कोई क्रिकेट अकादमी नहीं थी. ऐसे में पिता ने बेटी के बाल छोटे कर दिए, लड़कों जैसे कपड़े पहनाए और उसे बॉयज़ क्रिकेट अकादमी में दाखिल कराया. शुरुआत में सब हंसे, लेकिन जब वो लड़का गेंद को बाउंड्री के पार भेजने लगा, तो सब दंग रह गए. यही शेफाली की वो शुरुआत थी जिसने भारत को उसकी लेडी सहवाग दी.
मुश्किल वक्त, जब पापा अस्पताल में थे
कहानी यहीं खत्म नहीं होती. कुछ महीने पहले शेफाली की जिंदगी जैसे थम सी गई थी. लगातार खराब प्रदर्शन के चलते उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया था. इसी दौरान उनके पिता को हार्ट अटैक आया. शेफाली ने एक इंटरव्यू में बताया मैंने पापा को नहीं बताया कि मुझे टीम से निकाल दिया गया है, क्योंकि उन्हें दो दिन पहले ही हार्ट अटैक आया था. एक तरफ पिता अस्पताल में थे, दूसरी तरफ उनका करियर अधर में था लेकिन इस बेटी ने हार मानने से इनकार कर दिया. उसने खुद को संभाला और मैदान पर लौटने की कसम खाई.
‘लेडी सहवाग’ का कमाल
प्रतीका रावल के चोटिल होने पर शेफाली को टीम में शामिल किया गया. सेमीफाइनल में उनका बल्ला नहीं चला, लेकिन फाइनल में उन्होंने साउथ अफ्रीका के खिलाफ ऐसी पारी खेली जिसने हर किसी को हैरान कर दिया. स्मृति मंधाना के साथ 104 रनों की साझेदारी, 78 गेंदों पर 87 रन और गेंदबाजी में दो बड़े विकेट ये सब मिलकर उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच बना गया. मैच के बाद शेफाली ने कहा भगवान ने मुझे कुछ अच्छा करने के लिए भेजा है। यह जीत मेरे पापा और हर उस लड़की की है जो समाज से लड़कर अपने सपनों को जीती है.