Sheikh Hasina Verdict: बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम ट्रिब्यूनल (ICT-BD) ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को मौत की सजा सुनाई है। इस फैसले के बाद बांग्लादेश में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है, और इसी को देखते हुए देश की अंतरिम सरकार ने नागरिकों से संयम बरतने की अपील की है। अब सवाल उठ रहा है कि निर्वासित होकर भारत में रह रहीं शेख हसीना के पास इस स्थिति में क्या विकल्प बचे हैं। इससे पहले जानना जरूरी है कि हसीना पर किस प्रकार के आरोप साबित हुए हैं।
कोर्ट का फैसला: मानवता के खिलाफ अपराध
इंटरनेशनल क्राइम ट्रिब्यूनल बांग्लादेश ने 78 वर्षीय शेख हसीना और उनके पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल को पिछले साल छात्र विद्रोह के दौरान ‘मानवता के विरुद्ध अपराध’ के लिए उनकी अनुपस्थिति में मृत्युदंड सुनाया। महीनों तक चले मुकदमे के बाद ICT-BD ने हसीना को हिंसक दमन का “मास्टरमाइंड और प्रमुख सूत्रधार” बताया, जिसमें सैकड़ों प्रदर्शनकारियों की जान गई। इसी तरह के आरोपों में पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल को भी मृत्युदंड की सजा दी गई। पिछले साल 5 अगस्त को बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों के बाद शेख हसीना बांग्लादेश से भागकर भारत में रह रही हैं। इससे पहले अदालत ने उन्हें भगोड़ा घोषित किया था।
शेख हसीना के पास 2 विकल्प
फैसले के खिलाफ हसीना तब तक अपील नहीं कर सकतीं जब तक वह फैसले के 30 दिनों के भीतर सरेंडर नहीं करतीं या गिरफ्तारी नहीं देतीं। यानी उनके पास ICT-BD के इस फैसले को चुनौती देने के लिए 17 दिसंबर 2025 तक का समय है। यदि शेख हसीना इस तारीख तक बांग्लादेश की किसी कोर्ट में सरेंडर नहीं करतीं या गिरफ्तारी नहीं देतीं, तो उनके अपील का कानूनी अधिकार अपने आप समाप्त हो जाएगा। हालांकि, बांग्लादेश में वर्तमान माहौल को देखते हुए, आवामी लीग के नेताओं को चुन-चुनकर निशाना बनाया जा रहा है। ऐसे में शेख हसीना ने खुद इस फैसले को गलत बताया है और संभावना कम ही है कि वह बांग्लादेश जाकर सरेंडर करने का जोखिम उठाएंगी।
कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए हसीना का ऑडियो जारी किया
यह फैसला महीनों लंबे ट्रायल के बाद आया, जिसमें अभियोजन पक्ष ने वायरल ऑडियो, गवाह और मानवाधिकार रिपोर्ट्स पेश कीं। कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए हसीना का वह ऑडियो जारी किया, जिसमें वे पुलिस प्रमुख से "लोगों पर गोलियां चलाने" का आदेश दे रही थीं। प्रथम आलोचक जैसे मीडिया ने इसे लाइव दिखाया। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक बांग्लादेश में, 15 जुलाई से 15 अगस्त 2024 तक 1400 से ज्यादा लोग मारे गए थे। कोर्ट ने इसे "सिस्टेमैटिक हिंसा" करार दिया।