ईरान का तेल टैंकर पिंग शुन, जो भारत के लिए 6 लाख बैरल कच्चा तेल लेकर जा रहा था, अब चीन की ओर मुड़ गया है। यह जहाज 4 अप्रैल को गुजरात के वडिनार बंदरगाह पहुंचने वाला था, लेकिन अचानक इसकी दिशा बदल गई।
30 दिन की अस्थायी छूट दी है
इस बदलाव के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जिनमें से एक है अमेरिकी प्रतिबंधों का खतरा। अमेरिका ने ईरान पर प्रतिबंध लगाए हैं, और भारत ने भी 2019 से ईरान से तेल आयात बंद कर दिया था। हालांकि, अमेरिका ने हाल ही में समुद्र में मौजूद ईरानी तेल की खरीद पर 30 दिन की अस्थायी छूट दी है, जिससे भारत को ईरानी तेल खरीदने का मौका मिला हैै।
चीन में पेमेंट और वितरण की व्यवस्था अलग
पेमेंट और लॉजिस्टिक्स की समस्याओं के कारण यह जहाज चीन की ओर मुड़ गया होगा। चीन में पेमेंट और वितरण की व्यवस्था अलग है, जिससे यह खेप भारत के बजाय चीन जा रही है। भारत सरकार ईरान के साथ तेल व्यापार को फिर से शुरू करने के लिए प्रयास कर रही है। अमेरिका ने ईरान पर लगे प्रतिबंधों को 30 दिनों के लिए निलंबित कर दिया है, जिससे भारत को ईरानी तेल खरीदने का मौका मिला है। भारत ने ईरान से 6 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदने के लिए एक जहाज गुजरात के वडिनार बंदरगाह पर भेजा है।
भारत सरकार के कदम:
विविधीकरण: भारत अपनी तेल आयात रणनीति में विविधीकरण कर रहा है, जिससे वह एक देश पर निर्भर न रहे।
रूस से आयात: भारत रूस से तेल आयात बढ़ा रहा है, जिससे उसकी ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हो।
ईरान के साथ बातचीत: भारत ईरान के साथ तेल व्यापार को फिर से शुरू करने के लिए बातचीत कर रहा है।
ईरान के साथ तेल व्यापार के भविष्य
ईरान के साथ तेल व्यापार का भविष्य अनिश्चित है, क्योंकि यह अमेरिका के प्रतिबंधों और ईरान की राजनीतिक स्थिति पर निर्भर करता है। यदि अमेरिका के प्रतिबंध हट जाते हैं, तो ईरान के साथ तेल व्यापार में वृद्धि हो सकती है।