
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैच को लेकर केंद्र सरकार और भारतीय क्रिकेट बोर्ड पर सीधा हमला बोला है। पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में कहा गया कि दुबई में हुआ यह मैच “बेशर्मी की पराकाष्ठा” है। संपादकीय के मुताबिक, देशभक्तों ने मैच शुरू होते ही अपने टीवी बंद कर दिए, जबकि बीजेपी और उसके सहयोगियों ने “दरवाजे-खिड़कियां बंद कर पाकिस्तानियों के साथ इस खेल का आनंद लिया।”
“पाकिस्तान के साथ खेलने की जिद सरकार की”
सामना ने लिखा कि पाकिस्तान के साथ क्रिकेट खेलने का फैसला पूरी तरह केंद्र सरकार और बीसीसीआई पर थोप दिया गया। संपादकीय में कहा गया कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट बोर्ड में अध्यक्ष जय शाह की नियुक्ति केवल “व्यापारिक मकसद” से की गई है, न कि देशभक्ति के लिए। यहां तक कि अमित शाह पर यह आरोप लगाया गया कि उन्होंने अपने बेटे को योग्यता के बजाय राजनीतिक ताकत से यह पद दिलाया। इसके साथ ही नाना पाटेकर और सुनील गावस्कर का उल्लेख करते हुए अख़बार ने कहा कि दोनों ने पाकिस्तान के साथ खेलने का विरोध किया और सरकार का मुखौटा उतार दिया।
“भाजपा की भूमिका दोमुंहे केंचुए जैसी”
संपादकीय में भाजपा पर तीखा वार करते हुए कहा गया कि एक ओर पाकिस्तानी अभिनेत्री वाली फिल्म रिलीज़ नहीं होने दी जाती, दूसरी ओर पाकिस्तानी खिलाड़ियों के साथ करोड़ों का मैच खेला जाता है। इसमें लिखा गया, “इस मैच ने भाजपा की देशभक्ति के ढोंग को नंगा कर दिया है।”
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“टीम इंडिया ने शहीदों का अपमान किया”
शिवसेना ने भारतीय क्रिकेट टीम पर भी सवाल उठाए। अख़बार के अनुसार, जब ब्राज़ील- अर्जेंटीना फुटबॉल विवाद में पूरी टीम मैदान छोड़ सकती है, तो भारतीय क्रिकेटरों ने क्यों पाकिस्तान के खिलाफ खेला? साथ ही टीम इंडिया की जीत को “फिक्सिंग” बताते हुए यह भी कहा गया कि कप्तान सूर्यकुमार यादव का “सेना को समर्पण” करना शहीदों का अपमान है। संपादकीय में लिखा गया कि अगर इतनी नफरत है तो फिर सरकार ने पाकिस्तान से मैच खेलने की अनुमति क्यों दी?
“सट्टेबाजी और पैसों का खेल”
सामना ने दावा किया कि इस मैच से पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड को हजारों करोड़ रुपये का फायदा हुआ और इसका बड़ा हिस्सा सट्टेबाजों तक गया। सवाल उठाया गया कि क्या यह पैसा भारत में आतंक फैलाने वालों तक नहीं जाएगा?
“हिंदुत्व और राष्ट्रवाद का ढोंग उजागर”
शिवसेना (उद्धव) ने कहा कि यह मैच भाजपा सरकार के “हिंदुत्व और राष्ट्रवाद” के असली चेहरे को बेनकाब करता है। संपादकीय में तीखे शब्दों में लिखा गया कि दुबई का यह मुकाबला आतंकवादियों को आर्थिक मदद पहुंचाने जैसा है और प्रत्येक भारतीय को इसकी निंदा करनी चाहिए। इस तरह से सामना के संपादकीय ने भारत-पाक क्रिकेट मैच को लेकर सरकार, बीसीसीआई और भाजपा पर सीधे-सीधे सवाल दागे और इसे देशभक्ति के नाम पर पाखंड करार दिया।