मध्य प्रदेश को यूं ही "अजब-गजब एमपी" नहीं कहा जाता। यहां के गांव, कस्बे, मंदिर और यहां तक कि रेलवे स्टेशन भी अपने आप में कुछ न कुछ अनोखा समेटे हुए हैं। ऐसा ही एक उदाहरण है शिवपुरी रेलवे स्टेशन, जो सुबह के वक्त तो सामान्य नजर आता है, लेकिन दोपहर 12 बजते ही अचानक वीरान हो जाता है। न कोई यात्री, न ट्रेन की आवाज और न ही स्टेशन पर हलचल। ऐसा लगता है मानो समय ठहर गया हो। स्थानीय लोग इसे कोई अंधविश्वास नहीं, बल्कि रेलवे की अनदेखी मानते हैं। दरअसल, इस स्टेशन से दिन के समय कोई यात्री ट्रेन ही नहीं चलती, जिसके चलते यहां यात्रियों की आवाजाही पूरी तरह से ठप हो जाती है।
12 बजे के बाद स्टेशन पर क्यों छा जाता है सन्नाटा?
शिवपुरी रेलवे स्टेशन पर सुबह के समय हलचल देखने को मिलती है। लोग आते हैं, ट्रेनें गुजरती हैं और प्लेटफॉर्म पर चहल-पहल रहती है। लेकिन दोपहर के 12 बजते ही मानो पूरी व्यवस्था ठप हो जाती है। न कोई ट्रेन आती है, न जाती है और न ही कोई यात्री नजर आता है। दरअसल, दिन के समय यहां कोई भी पैसेंजर या एक्सप्रेस ट्रेन नहीं चलाई जाती है, जिससे स्टेशन निर्जन सा नजर आता है।
अंधविश्वास नहीं, रेलवे की अनदेखी है वजह
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस वीरानी के पीछे कोई रहस्यमयी कहानी नहीं है। न कोई भूत-प्रेत की बात है, न कोई दंतकथा। इसका असली कारण रेलवे की ओर से इस रूट पर ट्रेनों की कमी है। दिन के वक्त ट्रेनों का संचालन नहीं होने से यात्रियों को मजबूरी में बसों का सहारा लेना पड़ता है।
मेमू ट्रेन की मांग कर रहे हैं स्थानीय लोग
शिवपुरी के नागरिकों ने गुना से ग्वालियर ट्रैक पर मेमू ट्रेन चलाने की मांग की है। उनका कहना है कि अगर दिन में एक-दो सस्ती पैसेंजर ट्रेनें शुरू की जाएं, तो स्टेशन पर फिर से रौनक लौट सकती है। इससे न केवल आम यात्रियों को सुविधा मिलेगी बल्कि स्टेशन भी जीवंत हो जाएगा।
दिन में सस्ती यात्रा का विकल्प बन सकती है ट्रेन सेवा
बसों के मुकाबले ट्रेन यात्रा सस्ती और सुविधाजनक होती है। अगर रेलवे मेमू या पैसेंजर ट्रेन की शुरुआत करता है तो शिवपुरी से गुना या ग्वालियर जाने वाले यात्रियों को राहत मिलेगी। साथ ही स्टेशन की वीरानी भी खत्म हो जाएगी।
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Shivpuri Railway Station
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