बीजेपी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का नाम इस पद की दौड़ में सबसे आगे बताया जा रहा है। रविवार को शिवराज सिंह चौहान ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से दिल्ली के झंडेवालान स्थित संघ कार्यालय में करीब 45 मिनट तक मुलाकात की। इस गोपनीय बैठक के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि शिवराज को पार्टी की कमान सौंपी जा सकती है। सितंबर में बीजेपी अध्यक्ष का चुनाव संपन्न कराने की तैयारी है, ऐसे में चौहान का नाम सुर्खियों में है।
क्यों अहम है यह मुलाकात
करीब दो साल बाद शिवराज सिंह चौहान और मोहन भागवत की मुलाकात हुई है। यह बैठक बंद कमरे में हुई, जिसमें क्या चर्चा हुई, यह सामने नहीं आया है। हालांकि सूत्रों के मुताबिक, भाजपा के नए अध्यक्ष को लेकर संघ और पार्टी स्तर पर माथापच्ची चल रही है और इस कड़ी में चौहान और भागवत की बैठक को बेहद अहम माना जा रहा है।
शिवराज के पक्ष में मजबूत तर्क
शिवराज सिंह चौहान का राजनीतिक सफर लंबा और अनुभव से भरा हुआ है। वे 6 बार लोकसभा चुनाव जीत चुके हैं और चार बार मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। उनके कार्यकाल में शुरू की गई "लाड़ली बहना योजना" ने चुनावों में गेमचेंजर की भूमिका निभाई और अब यह अन्य राज्यों के लिए रोल मॉडल बन चुकी है। शिवराज 13 साल की उम्र में आरएसएस से जुड़े थे और इमरजेंसी के दौरान जेल भी गए। वे ओबीसी वर्ग से आते हैं और संघ के पसंदीदा नेताओं की सूची में सबसे ऊपर माने जाते हैं।
जेपी नड्डा का कार्यकाल बढ़ने के बाद बढ़ी चर्चा
वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का कार्यकाल जनवरी 2024 में खत्म हो गया था। संगठनात्मक चुनावों की वजह से इसे जून तक और फिर छह महीने के लिए बढ़ाया गया। अब पार्टी में नया अध्यक्ष चुनने की तैयारी शुरू हो गई है। नड्डा वर्तमान में मोदी कैबिनेट में स्वास्थ्य मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। ऐसे में सितंबर से पहले ही नए अध्यक्ष के नाम पर फैसला होने की संभावना है।
चुनाव से पहले संगठन में बदलाव
बीजेपी की रणनीति है कि उपराष्ट्रपति चुनाव के बाद पार्टी अध्यक्ष का चुनाव पूरा कर लिया जाए। 28 सितंबर से पहले नए अध्यक्ष की घोषणा होने की उम्मीद है। शिवराज सिंह चौहान के नाम को लेकर न सिर्फ संगठन बल्कि संघ भी सकारात्मक माना जा रहा है। अगर फैसला उनके पक्ष में जाता है, तो यह बीजेपी की आने वाली रणनीति के लिए बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।