Shivratri Special : भारत में शिवरात्रि एक अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक पर्व है, जिसे भगवान शिव की उपासना के रूप में मनाया जाता है. यह पर्व विशेष रूप से शिवभक्तों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होता है. इस दिन भक्तजन उपवास रखते हैं, रात्रि जागरण करते हैं और भगवान शिव का जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और भांग से अभिषेक करते हैं. इन सभी सामग्रियों में "भांग" का विशेष स्थान होता है. भांग का सेवन शिवरात्रि पर एक पारंपरिक प्रथा बन चुकी है, परंतु इसके पीछे धार्मिक, सांस्कृतिक और आयुर्वेदिक कारण भी छिपे हैं.
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव को भांग अत्यंत प्रिय है. कहा जाता है कि समुद्र मंथन के समय जब विष (हलाहल) निकला, तब शिवजी ने उसे पी लिया और अपने कंठ में रोक लिया. विष के प्रभाव को शांत करने हेतु उन्हें ठंडी चीज़ों की आवश्यकता थी. भांग, धतूरा और बेलपत्र जैसी वस्तुएँ उनके शरीर की उष्णता को नियंत्रित करने में सहायक मानी गईं. तभी से शिव पूजन में इन चीज़ों का महत्व बढ़ गया.
भांग का सेवन शिवरात्रि पर एक आध्यात्मिक प्रतीक भी है. यह ध्यान और साधना में मन को एकाग्र करने में मदद करती है — ऐसा कई साधकों और तांत्रिकों का मानना है. शिव को "योगियों के देव" कहा जाता है, और भांग को उनके तपस्वी स्वरूप से जोड़ा जाता है. इसे ग्रहण करने से मनुष्य सांसारिक मोह-माया से कुछ समय के लिए मुक्त महसूस करता है और ध्यान की अवस्था में पहुँचने में सहायता मिलती है.
आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से भी भांग में औषधीय गुण होते हैं. नियंत्रित मात्रा में इसका सेवन पाचन में सुधार, मानसिक तनाव कम करने और शरीर को ठंडक देने में सहायक माना गया है. यही कारण है कि शिवरात्रि जैसे पर्व पर लोग इसका सीमित मात्रा में सेवन करते हैं, जैसे कि ठंडाई, भांग की गोली या भांग मिश्रित प्रसाद के रूप में.
हालाँकि, यह ध्यान रखना आवश्यक है कि भांग का सेवन सीमित मात्रा में और विवेकपूर्ण ढंग से ही करना चाहिए। अति सेवन से नशा, भ्रम और स्वास्थ्य समस्याएँ हो सकती हैं, जो किसी भी धार्मिक पर्व की भावना के विपरीत है.
शिवरात्रि पर भांग का सेवन केवल परंपरा नहीं, बल्कि उसके पीछे गहरे धार्मिक और आयुर्वेदिक कारण छिपे हैं. यह भगवान शिव के प्रति भक्ति प्रकट करने का एक माध्यम है, साथ ही आत्म-शुद्धि और ध्यान के लिए भी सहायक माना जाता है. फिर भी, इसका प्रयोग श्रद्धा और संयम के साथ ही करना उचित है.