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Shree Parle - G : भारत में अगर किसी बिस्किट ने दिलों में खास जगह बनाई है, तो वह है पार्ले-जी (Parle-G)। यह सिर्फ एक बिस्किट नहीं, बल्कि हर भारतीय की यादों का हिस्सा है. इसे अक्सर प्यार से "श्री पार्ले-जी" कहा जाता है. एक सम्मान, जो इसे घर-घर में मिली लोकप्रियता और लोगों की भावनात्मक जुड़ाव की वजह से मिला। चाय के साथ इसकी जोड़ी, बच्चों के टिफिन से लेकर रेलवे स्टेशनों तक इसकी मौजूदगी, इसे एक आइकॉनिक ब्रांड बनाती है.
"श्री" क्यों कहा जाता है पार्ले-जी को?
"श्री" शब्द भारतीय संस्कृति में सम्मान और आदर का प्रतीक है. पार्ले-जी को "श्री पार्ले-जी" कहने के पीछे कारण यही है कि इस बिस्किट ने न सिर्फ हर वर्ग के लोगों की पसंद बनकर भरोसा जीता, बल्कि इसे कभी लग्जरी नहीं बल्कि "सबके लिए" बनाया गया। इसने दशकों से अपने दाम को न के बराबर बढ़ाया, ताकि कोई भी बच्चा या परिवार इस स्वाद से वंचित न रह जाए.
बिना दाम बढ़ाए, मुनाफे में अव्वल
पार्ले-जी की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि इसने लंबे समय तक अपने उत्पाद का दाम लगभग स्थिर रखा, लेकिन फिर भी मुनाफे में जबरदस्त इजाफा किया। कंपनी ने मार्केटिंग और उत्पादन लागत को समझदारी से संतुलित कर, वॉल्यूम (यानी मात्रा) के आधार पर मुनाफा कमाया। इसकी कम कीमत ने बड़े पैमाने पर ग्राहकों को जोड़ा और इसके चलते पार्ले-जी ने 2013 में ही 5000 करोड़ रुपए से ज्यादा की बिक्री दर्ज की थी, जिससे यह दुनिया का सबसे अधिक बिकने वाला बिस्किट ब्रांड बन गया.
विश्वसनीयता और गुणवत्ता
ब्रांड ने कभी अपने गुणवत्ता से समझौता नहीं किया. जब दुनिया महंगाई की मार झेल रही थी, पार्ले-जी ने आम आदमी की पहुंच में बने रहने को प्राथमिकता दी। यही वजह है कि यह सिर्फ एक बिस्किट नहीं, बल्कि भावनाओं का हिस्सा बन गया. आज भी जब हम पार्ले-जी का पैकेट देखते हैं, तो उसमें न कोई भारी-भरकम डिजाइन है, न कोई ग्लैमर, फिर भी यह हर पीढ़ी के दिल के बेहद करीब है. "श्री पार्ले-जी" कहना इस ब्रांड को दी गई वो श्रद्धांजलि है, जो उसने हमारी बचपन की यादों, हमारे स्वाद और हमारे जीवन के छोटे-छोटे पलों को खास बनाकर कमाई है, बिना दाम बढ़ाए, भरोसा बढ़ाकर.