Ram Mandir: श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने बड़ा फैसला लिया है। ट्रस्ट अब सुप्रीम कोर्ट से राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद में उपयोग किए गए ऐतिहासिक दस्तावेजों और पुरातात्विक सबूतों को वापस मांगेगा। ये सबूत भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की खुदाई में मिले थे, जिनके आधार पर 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर के पक्ष में ऐतिहासिक फैसला सुनाया था।
म्यूजियम में रखे जाएंगे मंदिर के दस्तावेज और सबूत
राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने अयोध्या में पत्रकारों से बातचीत में इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा, अब फैसले को चुनौती देने वाला कोई नहीं है। इसलिए ट्रस्ट सुप्रीम कोर्ट को औपचारिक पत्र लिखकर इन साक्ष्यों को सौंपने का अनुरोध करेगा। ये सबूत वर्तमान में कोर्ट की अभिरक्षा में हैं। ट्रस्ट की योजना इन दस्तावेजों और अवशेषों को राम मंदिर परिसर में बनने वाले विशेष म्यूजियम और गैलरी में रखने की है। यहां रामायण काल से जुड़े प्रसंगों को प्रदर्शित किया जाएगा, ताकि श्रद्धालु और शोधकर्ता इनका अध्ययन कर सकें। इसके लिए आईआईटी चेन्नई के साथ समझौता ज्ञापन पर काम चल रहा है। साथ ही, देश-विदेश की प्राचीन रामायण प्रतियां भी संग्रहित की जाएंगी।
भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत बनेंगे सबूत
नृपेंद्र मिश्र ने बताया कि राम मंदिर परिसर केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि शोध और सांस्कृतिक केंद्र बनेगा। यह कदम राम जन्मभूमि की ऐतिहासिकता को संरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। ट्रस्ट की हालिया बैठक में इस पर चर्चा हुई और जल्द पत्र लिखा जाएगा। यह फैसला राम मंदिर आंदोलन के लंबे संघर्ष के बाद आया है, जब सुप्रीम कोर्ट के फैसले से विवाद का पटाक्षेप हुआ। अब ये सबूत भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत बनेंगे।