भारत के ग्रुप कैप्टन और अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला सफलतापूर्वक 20 दिन के अंतरिक्ष मिशन के बाद धरती पर लौट आए हैं. वो 18 दिन अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर रहे और फिर ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट के कैप्सूल में सवार होकर प्रशांत महासागर में सुरक्षित लैंडिंग की. स्प्लैशडाउन के कुछ देर बाद शुभांशु शुक्ला और उनके साथी अंतरिक्ष यात्री ड्रैगन कैप्सूल से बाहर निकले. इसके साथ ही उनका अंतरिक्ष सफर सफलतापूर्वक पूरा हो गया. उनकी वापसी के साथ ही भारत ने अंतरिक्ष की दुनिया में एक नया इतिहास रच दिया. जैसे ही शुभांशु का यान समुद्र में उतरा, देशभर में खुशी की लहर दौड़ गई. उनके माता-पिता भावुक हो गए और गर्व से भर उठे. देशभर से बधाइयों और शुभकामनाओं का सिलसिला शुरू हो गया.
प्रधानमंत्री मोदी ने दी बधाई
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर शुभांशु शुक्ला के मिशन की सराहना की. उन्होंने लिखा, "मैं पूरे देश की ओर से ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला का स्वागत करता हूं. अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन का दौरा करने वाले भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री के रूप में उन्होंने साहस और समर्पण का परिचय दिया है. यह मिशन गगनयान की दिशा में एक बड़ा कदम है.
मां बोलीं – भगवान ने सुरक्षित वापस भेजा
शुभांशु की मां आशा शुक्ला ने मीडिया से कहा, "जब उनकी लैंडिंग हो रही थी, तो थोड़ा डर लगा, लेकिन भगवान ने उन्हें सही-सलामत वापस भेजा. मैं इस पल को शब्दों में बयां नहीं कर सकती."
बहन का गर्व भरा बयान
उनकी बहन शुचि मिश्रा ने कहा, "यह पूरे देश के लिए गर्व का पल है. हम बेहद उत्साहित हैं कि वो सकुशल लौट आए."
रक्षा मंत्री ने पिता से की बातचीत
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुभांशु के पिता शंभू दयाल शुक्ला से फोन पर बात की और बेटे की सफलता पर बधाई दी. उन्होंने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, "शुभांशु की एक्सिओम-4 मिशन से वापसी हर भारतीय के लिए गर्व की बात है. उन्होंने भारत की आकांक्षाओं को अंतरिक्ष में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है."
शुभांशु शुक्ला की सफलता सिर्फ एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं है, यह भारत की अंतरिक्ष यात्रा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है. उनकी वापसी ने यह साबित कर दिया है कि भारत अब अंतरिक्ष मिशनों में भी अग्रणी भूमिका निभाने के लिए तैयार है. देश उन्हें लंबे समय तक याद रखेगा.