पश्चिम बंगाल में नई राजनीतिक तस्वीर के साथ शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में बनी सरकार ने अपनी पहली ही कैबिनेट बैठक में बड़े और निर्णायक फैसलों की झड़ी लगा दी है। शासन, सुरक्षा और कल्याणकारी योजनाओं को केंद्र में रखते हुए कुल पांच अहम निर्णय लिए गए हैं। इन फैसलों को ‘डबल इंजन शासन’ की नई शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है, जिसने राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।
पहली कैबिनेट में बड़ा एजेंडा सेट
नई सरकार की पहली कैबिनेट बैठक में स्पष्ट संदेश दिया गया कि अब शासन तेज और निर्णायक होगा। बैठक में राज्य प्रशासन, सुरक्षा व्यवस्था और केंद्र-राज्य सहयोग को प्राथमिकता दी गई। मुख्यमंत्री ने चुनाव प्रक्रिया में शामिल सभी लोगों और मतदाताओं का आभार जताते हुए नई सरकार की दिशा और प्राथमिकताओं का रोडमैप सामने रखा।
आयुष्मान भारत और जनकल्याण पर फोकस
सरकार ने राज्य में आयुष्मान भारत योजना को लागू करने का बड़ा फैसला लिया है। इस योजना के तहत गरीब और कमजोर वर्ग को सालाना 5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज मिलेगा। राज्य और केंद्र मिलकर इसे लागू करेंगे, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
BNS लागू और प्रशासनिक बदलाव
बैठक में यह भी तय किया गया कि आज से भारतीय न्याय संहिता (BNS) लागू होगी। सरकार का दावा है कि पिछली व्यवस्था में पुराने कानूनों पर निर्भरता बनी हुई थी। इसके साथ ही IPS और IAS अधिकारियों को केंद्रीय प्रशिक्षण में भाग लेने की अनुमति देने का भी फैसला लिया गया है, ताकि प्रशासनिक दक्षता बढ़ाई जा सके।
सीमा सुरक्षा और जमीन हस्तांतरण
सरकार ने सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सीमावर्ती इलाकों में बाड़ लगाने और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए जमीन को BSF को ट्रांसफर करने की प्रक्रिया शुरू होगी। यह काम 45 दिनों के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे सीमा प्रबंधन को नया ढांचा मिलेगा।
321 कार्यकर्ताओं के परिवारों को सहारा
सरकार ने एक भावनात्मक और राजनीतिक रूप से अहम फैसला लेते हुए कहा है कि वे 321 बीजेपी कार्यकर्ताओं के परिवारों की जिम्मेदारी उठाएंगे, जिनकी मौत को पार्टी राजनीतिक हिंसा से जोड़ती रही है। इसे सरकार ने सामाजिक न्याय और भरोसे की नीति का हिस्सा बताया है।