Sanatan Chetna program: कोलकाता में आयोजित ‘सनातन चेतना और राम राज्य जागरण’ कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने सनातन धर्म, सांस्कृतिक विरासत और राज्य की सामाजिक परिस्थितियों को लेकर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल के लोगों को अपनी धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक मान्यताओं का पालन करने की स्वतंत्रता प्राप्त है, जिसे बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने पड़ोसी देशों में अल्पसंख्यकों की स्थिति का जिक्र करते हुए धार्मिक स्वतंत्रता के महत्व पर भी जोर दिया।
तुष्टीकरण की राजनीति पर साधा निशाना
अपने संबोधन में शुभेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया कि लंबे समय तक चली तुष्टीकरण की राजनीति से राज्य को नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि ऐसी नीतियों का असर सामाजिक और जनसांख्यिकीय संतुलन पर पड़ा है। अधिकारी ने दावा किया कि अतीत में कई बार धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों को लेकर विवाद की स्थिति बनी, जिससे समाज में असंतोष पैदा हुआ। उन्होंने कहा कि भविष्य में सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं को अधिक प्रोत्साहन देने की आवश्यकता है।
युवाओं को इतिहास जानने की दी सलाह
कार्यक्रम में उन्होंने युवाओं से राज्य और देश के इतिहास को समझने का आह्वान किया। शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि नई पीढ़ी को यह जानना चाहिए कि स्वतंत्रता आंदोलन और विभाजन के दौर में बंगाल की क्या भूमिका रही। उन्होंने इतिहास से जुड़े कई प्रसंगों का उल्लेख करते हुए छात्रों और युवाओं से सामाजिक और राजनीतिक घटनाओं के प्रति जागरूक रहने की अपील की।
सीमा सुरक्षा और घुसपैठ का मुद्दा भी उठाया
विपक्ष के नेता ने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और सीमा सुरक्षा का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमावर्ती क्षेत्रों की निगरानी महत्वपूर्ण विषय हैं। अधिकारी ने अवैध घुसपैठ को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य और देश की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है। उन्होंने सीमा प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने पर जोर दिया।
बंगाल को सांस्कृतिक और आध्यात्मिक केंद्र बताया
अपने भाषण के अंत में शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि बंगाल केवल सांस्कृतिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक रूप से भी देश का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। उन्होंने व्यापारियों और उद्यमियों से राज्य में निवेश और कारोबार जारी रखने की अपील की। अधिकारी ने विश्वास जताया कि आने वाले समय में धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों के विकास के लिए और प्रयास किए जाएंगे तथा बंगाल की ऐतिहासिक पहचान को और मजबूत बनाया जाएगा।