पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के कुछ ही घंटों बाद शुभेंदु अधिकारी ने प्रशासनिक स्तर पर बड़े फैसले लेने शुरू कर दिए हैं। राज्य में चुनाव आयोग के विशेष पर्यवेक्षक रहे सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी सुब्रत गुप्ता को मुख्यमंत्री का सलाहकार नियुक्त किया गया है। इस फैसले को शुभेंदु सरकार की बड़ी प्रशासनिक रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं दक्षिण 24 परगना के एडीएम शांतनु बाला को मुख्यमंत्री का निजी सचिव बनाया गया है। इन नियुक्तियों के बाद बंगाल की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में नई चर्चा शुरू हो गई है।
चुनाव में निभाई थी अहम भूमिका
सुब्रत गुप्ता पश्चिम बंगाल कैडर के 1990 बैच के आईएएस अधिकारी रहे हैं। विधानसभा चुनाव 2026 के दौरान उन्हें चुनाव आयोग ने विशेष पर्यवेक्षक की जिम्मेदारी सौंपी थी। चुनाव खत्म होने के बाद शुभेंदु अधिकारी ने सार्वजनिक तौर पर चुनाव आयोग और अधिकारियों की तारीफ भी की थी। उन्होंने कहा था कि इस बार कई ऐसे मतदाता भी मतदान केंद्र तक पहुंचे, जो पहले डर और हिंसा के माहौल के कारण वोट डालने से बचते थे। शुभेंदु ने चुनाव को शांतिपूर्ण कराने के लिए अधिकारियों की भूमिका को अहम बताया था।
तीन अधिकारियों की हुई थी चर्चा
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 को इस बार शांतिपूर्ण और व्यवस्थित चुनाव के रूप में देखा गया। चुनाव प्रक्रिया के दौरान मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल, विशेष पर्यवेक्षक सुब्रत गुप्ता और विशेष पुलिस पर्यवेक्षक एनके मिश्रा की भूमिका काफी चर्चा में रही थी। प्रशासनिक हलकों में इन तीनों अधिकारियों को “थ्री मस्किटियर्स” कहा जाने लगा था। माना जा रहा है कि इन अधिकारियों के समन्वय और सख्त निगरानी के कारण इस बार चुनावी हिंसा पर काफी हद तक नियंत्रण देखने को मिला।
तकनीक और एआई का इस्तेमाल
सुब्रत गुप्ता को तकनीकी मामलों का विशेषज्ञ भी माना जाता है। चुनाव प्रक्रिया के दौरान उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल निगरानी का इस्तेमाल बढ़ाने पर जोर दिया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक संदिग्ध मतदाताओं की पहचान और फर्जी वोटिंग रोकने के लिए एआई तकनीक का इस्तेमाल किया गया। यही वजह रही कि इस बार चुनाव प्रक्रिया को पहले की तुलना में ज्यादा पारदर्शी और व्यवस्थित बताया गया। अब शुभेंदु सरकार में उनकी नई भूमिका को प्रशासनिक सुधारों से जोड़कर देखा जा रहा है।
नई सरकार की नई तैयारी
मुख्यमंत्री के सलाहकार के तौर पर सुब्रत गुप्ता की नियुक्ति को सिर्फ प्रशासनिक फैसला नहीं बल्कि राजनीतिक संकेत भी माना जा रहा है। माना जा रहा है कि नई सरकार प्रशासनिक ढांचे को मजबूत और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में आगे बढ़ सकती है। वहीं शांतनु बाला को निजी सचिव बनाए जाने के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय में भी बदलाव की शुरुआत दिखाई देने लगी है। शपथ ग्रहण के तुरंत बाद हुए इन फैसलों ने साफ संकेत दिया है कि शुभेंदु सरकार तेज गति से काम शुरू करना चाहती है।
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बंगाल की राजनीति में बढ़ी हलचल
नई नियुक्तियों के बाद बंगाल के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। विपक्ष इन फैसलों को लेकर लगातार नजर बनाए हुए है, जबकि बीजेपी समर्थक इसे प्रशासनिक मजबूती की दिशा में बड़ा कदम बता रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में बंगाल सरकार में और भी बड़े प्रशासनिक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। फिलहाल सुब्रत गुप्ता की एंट्री को शुभेंदु सरकार की सबसे चर्चित शुरुआती नियुक्तियों में माना जा रहा है।