मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, खाड़ी क्षेत्र में युद्ध रोकने के लिए रविवार तक अमेरिका-ईरान समझौते पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। ईरान पर लगी तेल पाबंदियां हटेंगी और अरबों डॉलर के फंड अनफ्रीज होंगे। अमेरिका ईरान के आसपास से सेना हटाएगा और अर्थव्यवस्था पुनर्निर्माण की योजना पेश करेगा। होर्मुज जलडमरूमध्य को अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए पूरी तरह खुला रखा जाएगा।
बातचीत कहां तक पहुंची?
17 फरवरी 2026 को जिनेवा में दूसरे दौर की परमाणु वार्ता हुई। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि 'गाइडिंग प्रिंसिपल्स' पर आम सहमति बन गई है। अब मसौदा लिखने का काम शुरू होगा।
इस्लामाबाद में बेनतीजा वार्ता
इससे पहले पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में US उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी संसद स्पीकर गालिबाफ के बीच घंटों बातचीत हुई, पर कोई नतीजा नहीं निकला। वेंस बोले, "स्थिति ईरान के लिए ज्यादा नुकसानदेह है"।
ईरान की शर्तें और अड़चनें
ईरानी राष्ट्रपति का रुख: मसूद पेजेश्कियान बोले, "अगर अमेरिका तानाशाही छोड़ दे और ईरानी राष्ट्र के अधिकारों का सम्मान करे, तो समझौते के रास्ते मिल जाएंगे"।
4 बड़ी मांगें
युद्ध का मुआवजा: अमेरिका अरबों डॉलर का नुकसान भरपाई करे।तेल प्रतिबंध हटे: ईरानी तेल को अंतरराष्ट्रीय बाजार में पूरी छूट मिले।होर्मुज पर संप्रभुता: अमेरिका ईरान का होर्मुज पर नियंत्रण माने।
लीगल गारंटी: अमेरिका लिखित गारंटी दे कि भविष्य में हमला नहीं होगा। ट्रंप ने खारिज किया था प्रस्ताव: ईरान ने पहले भी शांति प्रस्ताव भेजा था, जिसे डोनाल्ड ट्रंप ने 'कचरा' बताकर खारिज कर दिया था। ट्रंप बोले - "सीजफायर बेहद कमजोर है"।
4. समझौता क्यों जरूरी?
होर्मुज संकट: UN ने चेतावनी दी कि होर्मुज बंद होने से 4.5 करोड़ लोग भुखमरी का शिकार हो सकते हैं। दुनिया का 20% तेल यहीं से गुजरता है।पाकिस्तान की मध्यस्थता: ईरान ने पाकिस्तान के जरिए अमेरिका को जवाब भेजा है। शहबाज शरीफ बोले,"हमें ईरान का जवाब मिल गया है"।
जिनेवा में रविवार को डील की उम्मीद है, पर पेंच फंसे हुए हैं। ईरान मुआवजा और गारंटी मांग रहा है, अमेरिका होर्मुज खोलने पर अड़ा है। अगर डील नहीं हुई तो युद्धविराम टूट सकता है और तेल संकट गहरा जाएगा। फिलहाल 8 अप्रैल से सीजफायर जारी है, पर दोनों पक्ष 'टस से मस' होने को तैयार नहीं दिख रहे।