चांदी की कीमतों में आई तेज गिरावट ने निवेशकों को चौंका दिया है। साल की शुरुआत में रिकॉर्ड स्तर छूने के बाद अब चांदी अपनी पूरी बढ़त गंवा चुकी है। महज कुछ महीनों में करीब 2 लाख रुपये प्रति किलो की गिरावट दर्ज की गई है। ऐसे में बाजार में यह सवाल तेज हो गया है कि क्या मौजूदा स्तर पर चांदी खरीदना फायदे का सौदा हो सकता है या अभी और गिरावट बाकी है।
रिकॉर्ड तेजी के बाद टूटी रफ्तार
पिछले साल चांदी की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिला था, जिससे निवेशकों को मजबूत रिटर्न मिला। इस साल जनवरी में भी कीमतें ऑल टाइम हाई पर पहुंच गई थीं, लेकिन इसके बाद बाजार में तेज गिरावट शुरू हुई। तीन महीने पहले जहां चांदी करीब 4.39 लाख रुपये प्रति किलो के स्तर पर थी, वहीं अब यह गिरकर लगभग 2.38 लाख रुपये पर आ गई है।
2 लाख रुपये तक आई गिरावट
चांदी ने अपने पीक से करीब 2 लाख रुपये प्रति किलो की गिरावट दर्ज की है। इस गिरावट के साथ ही इस साल की पूरी बढ़त खत्म हो चुकी है। हालिया कारोबार में भी कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है और एमसीएक्स पर डिलीवरी रेट में हजारों रुपये की गिरावट दर्ज की गई है।
वैश्विक तनाव का उल्टा असर
आमतौर पर वैश्विक संकट के समय कीमती धातुओं में तेजी देखी जाती है, लेकिन इस बार तस्वीर अलग है। पश्चिम एशिया में तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बावजूद चांदी की कीमतें नीचे आई हैं। इसका कारण बाजार में बढ़ती अनिश्चितता और निवेशकों द्वारा जोखिम कम करने की रणनीति को माना जा रहा है।
डॉलर की मजबूती और मुनाफावसूली
अमेरिकी डॉलर की मजबूती ने भी चांदी की मांग को प्रभावित किया है। मजबूत डॉलर के चलते अन्य देशों के खरीदारों के लिए चांदी महंगी हो गई, जिससे डिमांड कमजोर पड़ी। इसके अलावा तेजी के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी, जिससे बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ गया।
क्या अभी खरीदारी सही रणनीति है?
विशेषज्ञों का मानना है कि गिरावट के बावजूद चांदी के फंडामेंटल्स मजबूत हैं। इंडस्ट्रियल सेक्टर में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है और कुल खपत में इसका बड़ा हिस्सा है। ऐसे में लॉन्ग टर्म निवेशक इस गिरावट को अवसर के रूप में देख सकते हैं, हालांकि निवेश से पहले बाजार की स्थिति और जोखिम का आकलन जरूरी है।