उज्जैन। सिंहस्थ 2028 की तैयारियों को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक में उन्होंने मध्यप्रदेश सरकार की लैंड पूलिंग और स्थायी निर्माण की योजना पर आपत्ति जताई। शाह ने कहा कि उज्जैन सिंहस्थ में प्रयागराज की तरह अस्थायी व्यवस्थाएं बनाई जानी चाहिए। नासिक और हरिद्वार के अनुभवों को अध्ययन में शामिल कर तुलनात्मक प्लान तैयार किया जाए। किसानों की जमीनों पर स्थायी निर्माण को लेकर भी सवाल उठे हैं।
स्थायी निर्माण पर उठे सवाल
मध्यप्रदेश सरकार सिंहस्थ 2028 के लिए उज्जैन में लगभग 2,376 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण कर रही है। इसमें किसानों की जमीनें भी शामिल हैं। किसान संगठन का कहना है कि वे मेले की अवधि में जमीन देने को तैयार हैं, लेकिन स्थायी निर्माण का विरोध करते हैं। उनका कहना है कि धार्मिक आयोजन अस्थायी व्यवस्था से भी सफल हो सकता है।
शाह ने दिया तुलनात्मक अध्ययन का सुझाव
बैठक में अमित शाह ने अधिकारियों से कहा कि श्रद्धालुओं की संभावित संख्या के आधार पर ही योजना बनाई जाए। नासिक और हरिद्वार जैसे धार्मिक आयोजनों के मॉडल को देखकर उसका तुलनात्मक अध्ययन किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि उज्जैन सिंहस्थ की तैयारी अस्थायी ढांचे और वैज्ञानिक प्लानिंग पर आधारित होनी चाहिए।
15 दिन में फिर होगी चर्चा
प्रजेंटेशन देखने के बाद शाह ने अधिकारियों और मुख्यमंत्री से कहा कि वे अपनी योजना पर पुनर्विचार करें। उन्होंने 15 दिन बाद फिर से बैठक बुलाने का निर्देश दिया, जिसमें संशोधित तैयारी प्रस्तुत करने को कहा गया। इस निर्णय से साफ है कि केंद्र सरकार सिंहस्थ जैसे आयोजन को अस्थायी, टिकाऊ और किसानों के हित में करना चाहती है।