मध्य प्रदेश के आदिवासी अंचल की आस्था को अब विकास का नया पंख मिलने जा रहा है। उज्जैन सिंहस्थ 2028 से जुड़े एक मेगा प्रोजेक्ट को हरी झंडी मिलते ही श्रृंगेश्वर धाम राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय धार्मिक पर्यटन मानचित्र पर अपनी पहचान बनाने की ओर बढ़ गया है। यह परियोजना केवल निर्माण नहीं, बल्कि आस्था, रोजगार और पर्यावरण संरक्षण का साझा सपना है।
सिंहस्थ 2028 से सीधा जुड़ाव
श्रृंगेश्वर धाम को उज्जैन सिंहस्थ 2028 के टूरिस्ट सर्किट से जोड़ा जाना इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। माही और मधुकन्या नदी के संगम पर स्थित यह पवित्र स्थल अब सिंहस्थ के दौरान आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए एक प्रमुख पड़ाव बनेगा। इससे झाबुआ जिला पर्यटन की मुख्यधारा में शामिल होगा और आदिवासी अंचल की धार्मिक पहचान को नया विस्तार मिलेगा।
6 करोड़ से बदलेगा धाम का स्वरूप
इस मेगा प्रोजेक्ट पर 6 करोड़ 28 लाख 21 हजार रुपए खर्च किए जाएंगे। योजना के तहत संगम स्थल पर 281 मीटर लंबा और 20 मीटर चौड़ा भव्य घाट बनाया जाएगा। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए नदी तक सुरक्षित पहुंच देने वाली 134 सीढ़ियां बनाई जाएंगी। साथ ही घाट के आसपास एक सुंदर उद्यान विकसित होगा, जो पर्यटन आकर्षण का केंद्र बनेगा।
प्रकृति की गोद में बसी आस्था
श्रृंगेश्वर धाम केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि प्रकृति और आध्यात्म का जीवंत संगम है। माही डैम के कारण पुराने मंदिर के जलमग्न होने के बाद यहां भव्य नए मंदिर की स्थापना हुई। गुरु पूर्णिमा, सोमवती अमावस्या और श्रावण मास में यहां विशेष धार्मिक अनुष्ठान होते हैं, जिनमें दूर-दराज से श्रद्धालु पहुंचते हैं।
स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा संबल
प्रोजेक्ट के पूरा होने से श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इससे होटल, परिवहन, भोजनालय और स्थानीय बाजारों को सीधा लाभ मिलेगा। पर्यटन आधारित गतिविधियों से युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर खुलेंगे, वहीं स्थानीय हस्तशिल्प और उत्पादों को भी नया बाजार मिलेगा।
नदी संरक्षण और सांस्कृतिक पहचान
घाट निर्माण और सौंदर्यीकरण से नदियों की स्वच्छता और संरक्षण को मजबूती मिलेगी। सुव्यवस्थित घाट होने से बड़े धार्मिक आयोजनों का संचालन सुचारू होगा, जिससे क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान और मजबूत होगी। यह प्रोजेक्ट आस्था के साथ-साथ पर्यावरण संतुलन का भी उदाहरण बनेगा।