देशभर में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) अभियान के दौरान बीएलओ पर बढ़ते काम के बोझ और लगातार दबाव ने हालात चिंताजनक बना दिए हैं। पिछले 19 दिनों में 6 राज्यों से 15 बीएलओ की मौत की खबरें सामने आ चुकी हैं। इनमें हार्ट अटैक, अचानक तबीयत बिगड़ने और आत्महत्या जैसे मामले शामिल हैं। परिजन और स्थानीय लोग इसे अत्यधिक काम, रात-दिन चल रही ऑनलाइन मीटिंग और टारगेट के तनाव से जोड़ रहे हैं।
छह राज्यों में मौतों का आंकड़ा 15 तक पहुंचा
देश के कई हिस्सों में बीएलओ पर लगातार फॉर्म डिजिटलाइजेशन और घर-घर सर्वे का दबाव बना हुआ है। विभिन्न राज्यों से आए आंकड़ों के अनुसार गुजरात, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, तमिलनाडु और केरल में बीएलओ की अचानक मौत और आत्महत्या जैसे मामले बढ़ते जा रहे हैं। कई परिजनों ने सीधे तौर पर काम के बोझ को जिम्मेदार बताया है।
पश्चिम बंगाल में दूसरा सुसाइड, कुल तीन मौतें
पश्चिम बंगाल के नदिया जिले में एक महिला बीएलओ का शव घर में फंदे पर लटका मिला। पुलिस को एक सुसाइड नोट भी मिला है। यह राज्य में SIR से जुड़ा दूसरा सुसाइड और तीसरी मौत है। परिजन लगातार दबाव और मानसिक तनाव को मौत की वजह बता रहे हैं।
राजस्थान और गुजरात में तेजी से बढ़े मामले
राजस्थान में जयपुर के एक बीएलओ ने ट्रेन के आगे कूदकर जान दे दी, जबकि करौली और सवाई माधोपुर में दो अन्य बीएलओ की मौत हो गई। वहीं गुजरात में केवल चार दिनों में चार बीएलओ की मौतें दर्ज की गईं, जिनमें कई की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी।
मध्य प्रदेश में एक रात में दो मौतें और कई बीमार
मध्य प्रदेश के रायसेन और दमोह जिलों में दो बीएलओ की अचानक तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई। एक बीएलओ छह दिनों से लापता बताया जा रहा है, जिनके परिवार का कहना है कि लगातार टारगेट और निलंबन की चेतावनियों ने उन्हें मानसिक रूप से तोड़ दिया था। भोपाल में भी दो बीएलओ को ड्यूटी के दौरान हार्ट अटैक आया।
डिजिटलाइजेशन का बढ़ा दबाव, परिजनों की बढ़ती नाराजगी
अधिकारियों के अनुसार कई राज्यों में फॉर्म वितरण लगभग पूरा हो चुका है, लेकिन डिजिटल अपलोडिंग की गति बेहद असमान है। कुछ राज्यों में 60% से अधिक फॉर्म डिजिटल हो चुके हैं, जबकि कुछ में यह आंकड़ा 10% से भी कम है। परिजन सवाल उठा रहे हैं कि क्या लक्ष्य पूरा करने के दबाव ने इन मौतों को जन्म दिया है।