संसद का शीतकालीन सत्र शुरू होते ही राजनीतिक माहौल अचानक गर्म हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मीडिया से कहा कि सदन में ड्रामा नहीं, डिलीवरी होनी चाहिए। इस बयान ने विपक्ष को आगबबूला कर दिया। सबसे तीखा हमला किया समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने, जिन्होंने कहा कि असली ड्रामा कौन कर रहा है, यह देश की जनता भली-भांति जानती है। अखिलेश ने आरोप लगाया कि SIR प्रक्रिया की आड़ में विपक्षी वोटरों के नाम काटे जा रहे हैं और BJP लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिश कर रही है।
डिंपल यादव ने भी SIR पर उठाए सवाल
अखिलेश के बाद सपा सांसद डिंपल यादव भी सरकार पर जमकर बरसीं। उन्होंने कहा कि बिहार में SIR की गड़बड़ी ने चुनाव परिणामों को प्रभावित किया था, और अब वही जल्दबाजी यूपी व बंगाल में की जा रही है। डिंपल ने दावा किया कि 40 प्रतिशत लोग अभी भी फॉर्म नहीं भर पाए हैं और BLO पर इतना दबाव है कि कई लोग मानसिक तनाव में आकर जान तक दे बैठे हैं। उन्होंने पूछा कि इन मौतों का जिम्मेदार कौन है। डिंपल का कहना है कि ड्रामा विपक्ष नहीं, बल्कि वह व्यवस्था कर रही है जिसने सामान्य लोगों को असमंजस और डर में डाल दिया है।
शादियों के मौसम में SIR क्यों- अखिलेश
अखिलेश यादव ने एक बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि SIR ऐसे समय में कराया जा रहा है जब देशभर में शादियों का पीक सीजन है। उन्होंने कहा कि लोग घरों से बाहर रहते हैं, रिश्तेदारों के यहां जाते हैं, और इसी दौरान BLO घर खाली पाकर कह देता है कि आपका फॉर्म नहीं मिला और आपका नाम वोटर लिस्ट से हटाया जा रहा है। अखिलेश ने इसे BJP की रणनीति बताया और कहा कि कई युवा अपनी नौकरी छोड़कर सिर्फ अपने माता-पिता के फॉर्म भरवाने घर आ गए हैं। उन्होंने कहा कि यह लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधा हमला है।
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SIR से वोट कटे तो लोकतंत्र पर वार होगा
शीतकालीन सत्र के पहले दिन ही पूरी विपक्षी एकजुट होकर सरकार और चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहा है। अखिलेश का कहना है कि न ऐप काम कर रहा है, न वेबसाइट, और बिना ट्रेनिंग के BLO को इतना भारी काम थमा दिया गया है। विपक्ष का आरोप है कि अगर वोटर लिस्ट में गड़बड़ी हुई, नाम हटाए गए और BLO पर दबाव जारी रहा तो यह सिर्फ प्रशासनिक गलती नहीं, बल्कि लोकतंत्र के अधिकारों का खुला उल्लंघन होगा। अब नजर इस बात पर है कि चुनाव आयोग विपक्ष की चिंताओं को गंभीरता से लेगा या SIR का विवाद और बड़ा रूप लेगा।