उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान का एक प्रमुख चरण पूरा हो गया है। 26 दिसंबर को फॉर्म जमा करने की अंतिम तिथि समाप्त होने के बाद चुनाव आयोग ने बड़ा अपडेट जारी किया है। प्रदेश की 15.44 करोड़ मतदाताओं की सूची से करीब 2.89 करोड़ नाम हटाए जाने तय हो गए हैं, जबकि मैपिंग नहीं हो पाने वाले 1.11 करोड़ मतदाताओं को नोटिस भेजकर दस्तावेज मांगे जाएंगे। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने बताया कि 2003 की पुरानी मतदाता सूची से 91 प्रतिशत मैपिंग पूरी हो चुकी है, शेष 9 प्रतिशत को अंतिम मौका दिया जाएगा।
25 प्रतिशत से अधिक वोटर प्रभावित
एसआईआर प्रक्रिया के तहत मृतक, स्थानांतरित, डुप्लीकेट और अनुपस्थित मतदाताओं की छंटनी की गई। इनमें 1.26 करोड़ स्थानांतरित, 46 लाख मृत, 23.70 लाख डुप्लीकेट, 83.73 लाख अनुपस्थित और 9.57 लाख अन्य श्रेणी के मतदाता शामिल हैं। लखनऊ, गाजियाबाद और प्रयागराज जैसे जिलों में सबसे ज्यादा नाम कट रहे हैं। नोएडा-गाजियाबाद में तो 25 प्रतिशत से अधिक वोटर प्रभावित हैं।
1.11 करोड़ मतदाताओं का रिकॉर्ड
मैपिंग न होने की स्थिति में क्या होगा? चुनाव आयोग के अनुसार जिन 1.11 करोड़ मतदाताओं का रिकॉर्ड 2003 की सूची से मैच नहीं हुआ, उन्हें 31 दिसंबर के बाद घर-घर नोटिस भेजे जाएंगे। इन मतदाताओं को अपनी पहचान, नागरिकता और उम्र साबित करने के लिए निर्धारित 13 दस्तावेजों में से कोई एक जमा करना होगा। दस्तावेज उम्र के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं, जैसे जन्म प्रमाण पत्र, स्कूल सर्टिफिकेट, आधार कार्ड, पासपोर्ट, राशन कार्ड या पैन कार्ड।
मतदाता सूची को शुद्ध और पारदर्शी बनाने का प्रयास
अगर दस्तावेज समय पर जमा नहीं किए गए तो नाम ड्राफ्ट सूची से हट सकता है। 31 दिसंबर को ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होगी। इसके बाद 30 जनवरी 2026 तक दावे-आपत्तियां दर्ज की जा सकेंगी। नोटिस चरण में सुनवाई और सत्यापन 21 फरवरी 2026 तक चलेगा। अंतिम सूची 28 फरवरी 2026 को प्रकाशित होगी। आयोग ने अपील की है कि प्रभावित मतदाता समय रहते दस्तावेज जमा करें, ताकि उनका वोटिंग अधिकार सुरक्षित रहे। यह प्रक्रिया मतदाता सूची को शुद्ध और पारदर्शी बनाने के लिए की जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे फर्जी और डुप्लीकेट वोटिंग पर अंकुश लगेगा, लेकिन आम मतदाताओं को जागरूक रहना होगा। बीएलओ घर-घर नोटिस पहुंचाएंगे और हेल्पलाइन पर भी जानकारी उपलब्ध है। एसआईआर से यूपी की मतदाता सूची में बड़ा बदलाव आने वाला है, जो आगामी चुनावों को प्रभावित करेगा।