देशभर में मतदाता सूचियों की सटीकता सुनिश्चित करने के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का दूसरा चरण शुरू हो गया है। इस प्रक्रिया में अब तकनीक का इस्तेमाल इतनी बारीकी से किया जा रहा है कि फील्ड लेवल से लेकर सर्वर तक हर बदलाव की ट्रैकिंग हो रही है। फर्जी पहचान, डुप्लिकेट एंट्री या गलत पते जैसी गड़बड़ियों को अब सिस्टम खुद पकड़ रहा है। यह चरण 7 फरवरी 2026 तक चलेगा, जिसमें 12 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं।
हर नाम की बारीकी से जांच
SIR अभियान के तहत मतदाता सूची में दर्ज हर नाम को फील्ड स्तर पर जांचा जाता है। बूथ लेवल अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर सत्यापन करते हैं कि मतदाता वास्तव में उस पते पर रह रहा है या नहीं। किसी का नाम दो बार दर्ज है या नहीं, यह भी जांच का अहम हिस्सा है। हर संशोधन मोबाइल ऐप के जरिए रियल टाइम में दर्ज होता है।
सर्वर पर डेटा की सीधी निगरानी
फील्ड से जुड़ी हर एंट्री सीधे सर्वर तक पहुंचती है। सिस्टम यह रिकॉर्ड रखता है कि किस अधिकारी ने कब, कहां और किस मतदाता की जानकारी अपडेट की। इससे अब गड़बड़ी या मानवीय गलती की संभावना बेहद कम हो गई है। सर्वर टीम इस डेटा की मिलान प्रक्रिया के जरिए डुप्लिकेट एंट्री को तुरंत चिन्हित करती है।
डिजिटल तकनीक बनी सटीकता की कुंजी
अब SIR प्रक्रिया में आधार लिंकिंग, फेस वेरिफिकेशन और डिजिटल फॉर्म्स जैसे तकनीकी फीचर शामिल हैं। सिस्टम किसी भी दोहराव या गलत एंट्री को अपने आप अलर्ट करता है। यह पूरी प्रक्रिया डिजिटल डिटेक्टिव की तरह काम करती है, जो हर गतिविधि पर नजर रखती है।
पारदर्शिता से बढ़ेगा भरोसा
SIR की सबसे बड़ी ताकत इसकी पारदर्शिता है। अगर किसी अधिकारी ने बिना जांच कोई बदलाव किया है, तो सिस्टम तुरंत उसे फ्लैग करता है। इससे फर्जी वोटिंग, गलत पहचान और डुप्लिकेट आईडी जैसी समस्याएं तेजी से खत्म हो रही हैं। अब नए वोटरों के नाम जोड़े जा रहे हैं और मतदाता सूची को पहले से ज्यादा सटीक बनाया जा रहा है।