भारत-पाकिस्तान सीमा पर स्थित सर क्रीक क्षेत्र एक दलदली पट्टी है, लेकिन इसकी रणनीतिक और आर्थिक अहमियत बेहद बड़ी है। इसी इलाके को लेकर दोनों देशों में लंबे समय से विवाद चला आ रहा है। हाल ही में भारत ने पाकिस्तान को चेतावनी दी है कि सर क्रीक सेक्टर में किसी भी दुस्साहस का जवाब इतना कड़ा होगा कि वह इतिहास और भूगोल दोनों को बदल देगा। आखिर सर क्रीक क्यों है इतना अहम और इस पर विवाद क्यों है? आइए जानते हैं विस्तार से।
सर क्रीक क्या है?
सर क्रीक गुजरात और पाकिस्तान के सिंध प्रांत के बीच स्थित 96 किलोमीटर लंबी दलदली पट्टी है, जो अरब सागर में मिलती है। पहली नजर में यह वीरान लगती है, लेकिन वास्तव में यह दोनों देशों के बीच समुद्री सीमा विवाद का केंद्र है। यहां सीमा रेखा को लेकर भारत और पाकिस्तान की अलग-अलग व्याख्याएं हैं, जिसके कारण यह मुद्दा दशकों से अनसुलझा है।विवाद की जड़
1947 के विभाजन के बाद गुजरात भारत में और सिंध पाकिस्तान में शामिल हो गया। 1968 में एक अंतरराष्ट्रीय न्यायाधिकरण ने रण कच्छ से जुड़े अधिकतर मुद्दों का हल निकाला, लेकिन सर क्रीक को लेकर विवाद बना रहा। पाकिस्तान 1914 के एक प्रस्ताव के आधार पर पूरे इलाके को अपना बताता है और सीमा को पूर्वी किनारे पर मानता है। वहीं भारत का तर्क है कि सीमा थालवेग सिद्धांत के अनुसार बीच की नौगम्य धारा में होनी चाहिए।
रणनीतिक और आर्थिक महत्व
सर क्रीक का महत्व केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है। यहां तेल और गैस के भंडार होने की संभावना है। इसके अलावा, अरब सागर में समुद्री सीमाओं और विशेष आर्थिक क्षेत्रों (Exclusive Economic Zones) के निर्धारण पर भी इसका असर पड़ता है। यही कारण है कि दोनों देशों के लिए यह दलदली पट्टी बेहद महत्वपूर्ण है। स्थानीय मछुआरे भी अकसर अनजाने में दूसरे देश की जलसीमा में चले जाते हैं और गिरफ्तार कर लिए जाते हैं, जिससे उनकी आजीविका प्रभावित होती है।
भारत की चेतावनी और हालिया हालात
हाल के वर्षों में पाकिस्तान ने इस क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां तेज की हैं। उसने नई बटालियन, नौसैनिक जहाज और चौकियां तैनात की हैं, साथ ही वायु रक्षा को मजबूत किया है। इसी पृष्ठभूमि में भारत ने स्पष्ट संदेश दिया है कि किसी भी दुस्साहस का करारा जवाब दिया जाएगा। रक्षा मंत्री ने इस क्षेत्र में टाइडल बर्थिंग सुविधा और संयुक्त नियंत्रण केंद्र का उद्घाटन भी किया, जिससे तटीय सुरक्षा और मजबूत होगी।