राम जन्मभूमि दान विवाद को लेकर मंदिर के दर्शन प्रभारी गोपाल जी राव ने जानकारी दी कि तीन सदस्यीय एसआईटी गठित की गई है, जो 15 जून को मामले की जांच के लिए राम जन्मभूमि परिसर का दौरा करेगी। उन्होंने बताया कि ट्रस्ट और स्टेट बैंक की ओर से पहले से ही ऑडिट चल रहा था, लेकिन कुछ गलतफहमियों के कारण यह मुद्दा सामने आया। इसी कारण ट्रस्ट ने स्वयं सरकार से जांच की मांग की।
तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने तेजी से कार्रवाई करते हुए 12 से 15 घंटे के भीतर तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन कर दिया, जिसके लिए ट्रस्ट सरकार का आभार व्यक्त करता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ट्रस्ट जांच में पूरा सहयोग करेगा और सभी आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराएगा। उन्होंने यह भी कहा कि जांच का उद्देश्य पारदर्शिता सुनिश्चित करना और समाज में पैदा हुई किसी भी गलतफहमी को दूर करना है।
भारी गड़बड़ी और घपला किया गया
वहीं, समाजवादी पार्टी के विधायक रविदास मेहरोत्रा ने कहा कि राम मंदिर में चढ़ावे के रूप में आने वाले धन में भारी गड़बड़ी और घपला किया गया है। यदि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और किसी वर्तमान या पूर्व न्यायाधीश की निगरानी में जांच हो तो सच्चाई सामने आ जाएगी कि कौन लोग इस कथित गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस धन का दुरुपयोग कर कुछ लोगों द्वारा संपत्तियां खरीदी गई हैं। उनके अनुसार, इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच आवश्यक है और यह जांच उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय के किसी न्यायाधीश की निगरानी में होनी चाहिए।
हिंसा पैदा करने की कोशिश कर रहे
इस बीच रविदास मेहरोत्रा ने कहा, "सरकार और उसके मंत्री जानबूझकर उत्तर प्रदेश में सांप्रदायिक तनाव और हिंसा पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। वे आपसी भाईचारे को खत्म करना और हिंदू-मुस्लिम एकता को तोड़ना चाहते हैं। नफरत फैलाकर वे लोगों को बांटकर चुनाव जीतना चाहते हैं। जनता का ध्यान असली मुद्दों से भटकाया जा रहा है। सरकार महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, बढ़ते अपराध या विकास के बारे में बात नहीं करती। स्वास्थ्य सेवाएं ठप हो गई हैं, लेकिन इस पर कोई चर्चा नहीं करता। युवाओं के साथ अन्याय हो रहा है। सरकार जानबूझकर इन अहम मुद्दों से ध्यान भटका रही है।"