Bus Rape: बारिश और अंधेरे के बीच घर लौटने की कोशिश कर रही 16 साल की नाबालिग के लिए स्लीपर बस का सफर जिंदगी का सबसे डरावना अनुभव बन गया। 4 अगस्त को परी चौक से बस में सवार हुई किशोरी के साथ ड्राइवर और कंडक्टर पर यौन हिंसा करने का आरोप है। पुलिस के मुताबिक, करीब 47 किलोमीटर तक बस चलने के बाद दोनों ने उसे दिल्ली के कश्मीरी गेट के पास उतार दिया। घटना के बाद दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
सफर सुरक्षित होना चाहिए था, लेकिन बन गया खौफनाक अनुभव
पुलिस के अनुसार, बारिश और अंधेरे के बीच परी चौक पर उतरने के बाद किशोरी ने स्लीपर बस का सहारा लिया था। उसे शायद यह अंदाजा भी नहीं रहा होगा कि जिस वाहन में वह सुरक्षित घर पहुंचने की उम्मीद से बैठ रही है, उसी में उसके साथ अपराध हो सकता है। आरोप है कि बस के ड्राइवर और कंडक्टर ने रास्ते में उसके साथ यौन हिंसा की। करीब 47 किलोमीटर का सफर तय होने के बाद उसे दिल्ली में कश्मीरी गेट के पास छोड़ दिया गया।
11 चालान के बावजूद सड़क पर दौड़ती रही बस
मामला सामने आने के बाद बस की निगरानी व्यवस्था भी सवालों के घेरे में आ गई। जानकारी के मुताबिक, इस बस पर पहले से 11 ट्रैफिक चालान थे। इसके बावजूद बस सड़कों पर चलती रही। सबसे गंभीर सवालों में से एक बस में लगे CCTV कैमरे को लेकर भी है, जो काम नहीं कर रहा था। यानी जिस व्यवस्था से यात्रियों की सुरक्षा और घटनाओं की निगरानी होनी चाहिए थी, वही मौके पर निष्क्रिय मिली।
कई चेक-प्वाइंट से गुजरी बस, फिर भी नहीं रुकी
पुलिस जांच के दौरान यह बात भी सामने आई कि बस कई पुलिस चेक-प्वाइंट से होकर गुजरी थी। इसके बावजूद उसे रोका नहीं गया। ऐसे में सवाल सिर्फ एक बस या दो आरोपियों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह भी सामने आता है कि सार्वजनिक परिवहन में सुरक्षा जांच कितनी प्रभावी है। खासकर रात में अकेले सफर करने वाले नाबालिगों और महिलाओं के लिए निगरानी की व्यवस्था कितनी मजबूत है, यह घटना उस पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
दिल्ली में सामने आए दूसरे मामलों ने भी बढ़ाई चिंता
इसी महीने दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के एक पार्क में 17 साल की लड़की से तीन लोगों द्वारा गैंगरेप का मामला भी सामने आया। आरोपियों ने कथित तौर पर खुद को पुलिसकर्मी बताया था। इन घटनाओं के बाद दिल्ली पुलिस ने खराब रोशनी वाले इलाकों, बंद पड़े CCTV और सुनसान स्थानों की पहचान कर सुरक्षा मजबूत करने के निर्देश दिए। इन मामलों ने यह सवाल फिर सामने ला दिया है कि किसी घटना के बाद सुरक्षा बढ़ाने से ज्यादा जरूरी उन खतरनाक जगहों और कमजोर व्यवस्थाओं की पहले पहचान करना है, जहां अपराध का खतरा बना रहता है।