मध्य प्रदेश में लगाए जा रहे बिजली के स्मार्ट मीटर एक नए विवाद में घिर गए हैं। खुलासा हुआ है कि इन मीटरों का निर्माण करने वाली कंपनी सऊदी अरब की है, जहां उच्च पदों पर पाकिस्तानी इंजीनियर कार्यरत हैं। सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि यह कनेक्शन प्रदेश और देश की साइबर सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है। जैसे ही यह जानकारी सामने आई, प्रदेश में राजनीतिक हलचल तेज हो गई और सरकार से तत्काल जांच की मांग उठने लगी।
विवाद की वजह
सूत्रों के अनुसार, प्रदेश में स्मार्ट मीटर लगाने का टेंडर एक विदेशी कंपनी को दिया गया है। इस कंपनी में पाकिस्तान से जुड़े इंजीनियर अहम पदों पर कार्यरत हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि स्मार्ट मीटर डेटा कलेक्शन और रिमोट कंट्रोल की सुविधा रखते हैं, जिससे साइबर अटैक या बिजली आपूर्ति बाधित करने जैसी घटनाएं संभव हैं।
सियासी बयानबाज़ी
मामला सामने आने के बाद सत्ता पक्ष ने कहा कि यदि पाकिस्तानी अधिकारियों की संलिप्तता पाई गई, तो प्रदेश में ऐसे मीटर नहीं लगाए जाएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत और पाकिस्तान के बीच किसी भी तरह का संवाद तब तक संभव नहीं है जब तक पाकिस्तान अपने रुख में बदलाव नहीं करता
विपक्ष का आरोप
विपक्ष ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करार दिया है। नेताओं का कहना है कि यह एक सोची-समझी साजिश हो सकती है, जिसमें साइबर अटैक या तोड़फोड़ की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। विपक्ष ने सरकार से तुरंत जांच कर रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की है।