
भाजपा की नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी इन दिनों राजनीति से थोड़ी दूरी बनाए हुए हैं और एक बार फिर अपने पुराने टीवी सीरियल की दुनिया में नजर आ रही हैं. हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने अपने राजनीतिक सफर, अमेठी में मिली हार और भविष्य की योजनाओं पर खुलकर बात की.
अमेठी में हार पर क्या बोलीं स्मृति ईरानी?
स्मृति ईरानी ने कहा कि उन्हें अमेठी में हार का दुख जरूर है, लेकिन उन्हें संतोष है कि उन्होंने पूरी मेहनत की और जनता के लिए काम किया. उन्होंने कहा, "अगर मैंने कोई काम नहीं किया होता, अगर लोग कहते कि मैंने अपने वादे नहीं निभाए, तो मुझे ज्यादा अफसोस होता. लेकिन मैंने अपनी तरफ से पूरी कोशिश की." उन्होंने यह भी कहा कि अगर राहुल गांधी 2024 में अमेठी से चुनाव लड़ते तो वो उन्हें हरा सकती थीं. उन्होंने कहा, "गांधी परिवार ने मुझसे चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया. अगर वो मैदान में ही नहीं उतरे, तो मैं क्या करूं?"
अमेठी सीट जीतने लायक थी या नहीं?
स्मृति ईरानी ने माना कि अमेठी हमेशा से कोई आसान या निश्चित जीत वाली सीट नहीं रही है. उन्होंने कहा कि शरद यादव और मेनका गांधी जैसे दिग्गज नेता भी यहां से हार चुके हैं. उन्होंने कहा, "गांधी परिवार ने अमेठी को इसलिए चुना क्योंकि वहां का सामाजिक समीकरण उनके पक्ष में था. कोई भी समझदार नेता उस सीट को नहीं चुनता, जहां हार पक्की हो."
क्या राजनीति से सन्यास ले रही हैं स्मृति?
इस सवाल पर उन्होंने साफ किया कि वो अभी राजनीति से रिटायर नहीं हो रही हैं. उन्होंने कहा, "मैं सिर्फ 49 साल की हूं और लोग तो इस उम्र में करियर शुरू करते हैं. मैं तीन बार की सांसद रह चुकी हूं."
चुनाव लड़ने को लेकर उन्होंने कहा, "बीजेपी 2029 में कुछ कहे, ये मैं नहीं जानती. हो सकता है पार्टी 2026 में ही कुछ फैसला ले ले या फिर 2025 में ही. चुनाव तो मैं कभी भी लड़ सकती हूं."
स्मृति ईरानी ने यह साफ कर दिया है कि अमेठी में हार के बावजूद वह राजनीति से दूर नहीं हुई हैं और भविष्य में भी चुनाव लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार हैं. उनका कहना है कि हार-जीत राजनीति का हिस्सा है, लेकिन उन्होंने जनता की सेवा में कोई कसर नहीं छोड़ी.