सांप कांड में न्यायाधीश रविता और उसके प्रेमी को मृत्युदंड की सजा हो चुकी है। जेल के अंदर दोनों दोषी अपनी दिनचर्या में शामिल हो गए है। साथ ही वह फांसी के सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की तैयारी कर रहे है, लेकिन इस सब के बीच 133 पन्नों के जजमेंट में न्यायाधीश ने मेरठ की घटनाओं के अलावा सोनम और सिया के क्रूरतम इरादों और उन बातों का जिक्र किया है, जिससे पति-पत्नी के बीच विश्वास की डोर डगमगा रही है। साथ ही सामाजिक ताना बाना भी दरकता दिखाई दे रहा है और युवाओं में शादी के प्रति भय का माहौल पनप रहा है।
हत्या का जिक्र भी किया
16 अक्टूबर को एडीजी-12 जयवीर सिंह नागर ने सांप कांड में अधिवक्ताओं से खचाखच भरी अदालत में जब अमित की हत्या में उनकी पत्नी रविता और प्रेमी अमरदीप को फांसी की सजा सुनाई तो अदालत अधिवक्ता की तालियों की गड़हड़ाहट से गूंज गई थी। 133 पेज के जजमेंट में न्यायाधीश ने हस्तिनापुर की दामिनी और लोहिया नगर की इल्मा की क्रूरता के अलावा इंदौरा के कारोबारी राजा रघुवंशी और पुणे के रियल एस्टेट कारोबारी केतन विशाल अग्रवाल की हत्या का जिक्र भी किया है। राजा की हत्या उनकी पत्नी सोनम ने प्रेमी विशाल चौहान के साथ पहाड़ों से फेंक कर की थी, जबकि केतन की होने वाली पत्नी सिया गोयल ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर राजस्थान के लोहागढ़ किले से धक्का देकर हत्या की थी।
घटना अत्यंत हृदयविदारक है
इन दोनों ही घटनाओं में सोनम व सिया ने पहले पुलिस को हादसा बताया था, लेकिन जब पुलिस ने जांच की तो दोनों की क्रूरता से पर्दा उठ गया। सजा पर फैसला सुनाते समय न्यायाधीश जयवीर सिंह नागर ने कहा, हमारे वेदों, पुराणों में कहा गया है -'यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता। सावित्री ने अपने पति सत्यवान के प्राण यमराज से वापस छीन लिए थे, यही है भारतीय नारी का आदर्श, लेकिन इस कलयुग में रविता ने सावित्री के आदर्शों को तार-तार किया है। यह घटना अत्यंत हृदयविदारक है। समाज में पति-पत्नी का रिश्ता विश्वास की नींव पर टिका होता है। यदि घर की रक्षक ही भक्षक बन जाए और प्रेमी के मोह में अंधी होकर अपने ही पति की हत्या कर दे, तो पूरा समाज असुरक्षित हो जाएगा।
सामाजिक तानाबाना भी दरकता है
ऐसी घटनाओं से युवाओं में शादी के प्रति भय का माहौल पैदा हो रहा है। यह अपराध रेयरेस्ट ऑफ द रेयर की श्रेणी में आता है। ऐसी घटनाओं से सामाजिक तानाबाना भी दरकता है। दो दिन में दो अदालतों से आए कठोर फैसलों के बाद अधिवक्ताओं की जुंबा पर एक ही बात है, यह फैसले आने वाले दिनों में मिल के पत्थर साबित हो सकते है, क्योंकि ऐसी घटनाओं से विश्वास की डोर गडमगा रही है और इस तरह के फैसलों से समाज में बड़ा संदेश जाएगा, क्योंकि सांप कांड से दो दिन पहले जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा द्वितीय ने भी नीले ड्रम में मुस्कान और साहिल को मुत्युदंड की सजा सुनकर ऐतिहासिक फैसला सुनाया था।