दुनियाभर में सांपों को लेकर डर और जिज्ञासा दोनों देखी जाती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दुनिया में 3000 से ज्यादा प्रजातियों में से करीब 300 ही जहरीली हैं। हर साल लाखों लोग सांप के काटने का शिकार होते हैं। इसी वजह से एंटीवेनम यानी विषरोधी दवा की जरूरत पड़ती है, जो सांप के जहर से ही तैयार की जाती है।
दवा बनाने में अहम भूमिका
सांप का जहर सिर्फ खतरनाक ही नहीं, बल्कि दवा के लिए बेहद जरूरी भी है। कई दवाएं इसी विष से बनती हैं, जो दर्द कम करने और खून जमने जैसी समस्याओं में काम आती हैं। गुजरात के धरमपुर स्थित सर्प अनुसंधान संस्थान जैसे केंद्र इस दिशा में काम कर रहे हैं। यहां अलग-अलग प्रजातियों का जहर सुरक्षित तरीके से एकत्र कर दवा कंपनियों को दिया जाता है।
जहर निकलता कैसे है
सांप के सिर के पीछे मौजूद ग्रंथियों में जहर बनता है। जब वह काटता है तो यही विष शरीर में जाता है। दवा बनाने के लिए प्रशिक्षित लोग खास तरीके से सांप का जहर निकालते हैं। इसमें सांप को एक पात्र पर दांत गड़ाने दिया जाता है, जिससे जहर बाहर आकर सुरक्षित रूप से इकट्ठा किया जा सके। यह काम पूरी सावधानी से किया जाता है।
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कीमत सुनकर रह जाएंगे हैरान
कुछ प्रजातियों के सांपों का जहर बेहद महंगा होता है। किंग कोबरा के जहर को दुनिया के महंगे विषों में गिना जाता है। इसकी कीमत लाखों डॉलर प्रति गैलन तक बताई जाती है। कुछ सांपों के जहर की कीमत 4000 से 13000 डॉलर प्रति ग्राम तक पहुंच जाती है। यह कीमत सोने से कई गुना ज्यादा है।

सोने से तुलना करें तो फर्क साफ
अगर एक ग्राम जहर की कीमत 13000 डॉलर मानी जाए तो इतने पैसों में करीब 78 से 79 ग्राम सोना खरीदा जा सकता है। यानी एक ग्राम जहर के दाम में कई तोले के गहने बन सकते हैं। मौजूदा बाजार दर के हिसाब से सोना 160 से 170 डॉलर प्रति ग्राम के आसपास है।

खतरनाक लेकिन जीवनरक्षक
सांप का जहर जितना जानलेवा है, उतना ही जीवन बचाने में भी काम आता है। यही वजह है कि इसकी मांग और कीमत दोनों ऊंची हैं। दवा कंपनियों के लिए यह बेहद कीमती कच्चा माल है। इसलिए कहा जाता है कि कुछ मामलों में सांप का जहर सोने से भी ज्यादा कीमती साबित होता है।