Veg Non Veg Packaging : साबुन, शैंपू, टूथपेस्ट और कॉस्मेटिक उत्पाद खरीदने वाले लोगों के लिए अब एक बड़ा बदलाव लागू हो गया है। केंद्र सरकार ने पैकेजिंग नियमों में संशोधन करते हुए ऐसे उत्पादों पर वेज और नॉन-वेज मूल की पहचान दिखाना अनिवार्य कर दिया है। नए नियम 21 सितंबर 2026 से लागू हो चुके हैं। इसका उद्देश्य ग्राहकों को उत्पाद की मूल सामग्री के बारे में अधिक स्पष्ट जानकारी देना है, ताकि खरीदारी के समय उन्हें किसी तरह की उलझन का सामना न करना पड़े।
पैकेट पर कैसे होगी पहचान?
नए नियमों के तहत उत्पाद की पैकेजिंग पर विशेष निशान लगाए जाएंगे। यदि किसी उत्पाद का मूल शाकाहारी श्रेणी में आता है तो उस पर हरे रंग का संकेत होगा। वहीं अगर किसी उत्पाद में अंडे, मांस या अन्य गैर-शाकाहारी स्रोतों से प्राप्त सामग्री का इस्तेमाल हुआ है तो उस पर लाल या भूरे रंग का संकेत लगाया जाएगा। यह निशान पैकेट के मुख्य हिस्से के ऊपरी भाग में दिखाई देगा, जिससे ग्राहक आसानी से उसे देख सकें।
किन उत्पादों पर लागू होंगे नियम?
यह बदलाव केवल खाने-पीने की वस्तुओं तक सीमित नहीं है। अब रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले साबुन, शैंपू, फेस क्रीम, टूथपेस्ट, लोशन और अन्य कॉस्मेटिक उत्पादों पर भी यह जानकारी देना जरूरी होगा। यानी ग्राहक अब किसी भी उत्पाद को खरीदने से पहले उसके पैकेट को देखकर यह समझ सकेंगे कि उसका मूल शाकाहारी है या गैर-शाकाहारी।
ग्राहकों को क्या मिलेगा फायदा?
सरकार का मानना है कि इससे ग्राहकों को बेहतर जानकारी के आधार पर फैसला लेने में मदद मिलेगी। कई बार लोग अपनी व्यक्तिगत पसंद, धार्मिक मान्यताओं या जीवनशैली के कारण कुछ खास प्रकार के उत्पादों से बचना चाहते हैं। ऐसे लोगों को अब लंबी सामग्री सूची पढ़ने की जरूरत नहीं होगी। पैकेट पर बना संकेत ही उन्हें उत्पाद की मूल प्रकृति के बारे में जानकारी दे देगा।
क्या गुणवत्ता से जुड़ा है यह निशान?
सरकार ने स्पष्ट किया है कि हरे या लाल-भूरे निशान का संबंध उत्पाद की गुणवत्ता, सुरक्षा या प्रभावशीलता से नहीं है। यह केवल उत्पाद के मूल स्रोत की जानकारी देने के लिए होगा। इसलिए किसी उत्पाद पर हरा निशान होने का मतलब यह नहीं है कि वह दूसरे उत्पाद से बेहतर या ज्यादा सुरक्षित है। ग्राहकों को अन्य जानकारी के लिए सामग्री सूची और लेबल भी पढ़ने होंगे।
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क्यों जरूरी माना गया यह बदलाव?
लीगल मेट्रोलॉजी (पैकेज्ड कमोडिटीज) नियमों में किए गए इस बदलाव का मकसद पैकेजिंग पर दी जाने वाली जानकारी को अधिक पारदर्शी बनाना है। सरकार का कहना है कि इससे उपभोक्ताओं को खरीदारी के दौरान अधिक स्पष्ट विकल्प मिलेंगे। अब जब भी कोई व्यक्ति साबुन, शैंपू, टूथपेस्ट या कॉस्मेटिक उत्पाद खरीदेगा, तो पैकेट पर मौजूद यह छोटा सा निशान उसकी पसंद और जरूरत के अनुसार सही निर्णय लेने में मदद करेगा।