Som Pradosh Vrat 2025: मार्गशीर्ष मास की कृष्ण पक्ष त्रयोदशी तिथि 17 नवंबर 2025 की सुबह से शुरू होकर 18 नवंबर की सुबह तक बनी रहती है, लेकिन उदय तिथि के आधार पर सोम प्रदोष व्रत 17 नवंबर, सोमवार को ही मनाया जाएगा। प्रदोष काल, जो शिव उपासना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है, उसी दिन शाम के समय पड़ता है, इसलिए धार्मिक दृष्टि से भी व्रत रखना और पूजा करना 17 नवंबर को ही श्रेष्ठ माना गया है। इस दिन भगवान शिव की आराधना करने से मानसिक शांति, रोगों से मुक्ति और पारिवारिक सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
समय ईश्वर तक पहुँचने का माध्यम
सोम प्रदोष व्रत में माना जाता है कि सायंकाल का समय ईश्वर तक पहुँचने का विशेष माध्यम बन जाता है। सूर्यास्त के बाद का यह प्रदोष काल शिवभक्तों के लिए बेहद शक्तिशाली माना गया है। इस समय शिवलिंग पर जलाभिषेक, मंत्रजाप और ध्यान करने से मन की नकारात्मकता दूर होती है और जीवन में नई ऊर्जा का संचार होता है। इस व्रत में व्यक्ति केवल नियमों का पालन ही नहीं करता, बल्कि अपनी भावनाओं और आस्था को शिवचरणों में अर्पित करता है। इसी कारण सोम प्रदोष साधारण दिनों की तुलना में अधिक फलदायी माना जाता है।
अत्यंत प्रभावी उपाय
शिव कृपा प्राप्त करने के लिए इस दिन एक सरल और अत्यंत प्रभावी उपाय बताया गया है। प्रदोष काल के दौरान शिवलिंग पर जल, दूध और गंगाजल का मिश्रण चढ़ाते हुए श्रद्धा से ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप किया जाए। यह मंत्र ब्रह्मांडीय ऊर्जा से जुड़ने का माध्यम माना जाता है और इसे प्रदोष काल में जपने पर इसका फल कई गुना बढ़ जाता है। पूजा के बाद दीप प्रज्वलित कर भगवान शिव की आरती करनी चाहिए, क्योंकि आरती प्रकाश और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है, जिससे घर और मन दोनों में शांति स्थापित होती है।
शिवजी के प्रिय तत्व
इस दिन दान का भी विशेष महत्व बताया गया है। शिवजी को प्रिय तत्वों जैसे दूध, दही, सफेद वस्त्र या गरीबों को भोजन दान करने से पितृदोष शांत होता है और मनोकामनाएँ धीरे-धीरे पूर्ण होने लगती हैं। श्रद्धा और विनम्रता के साथ किया गया यह व्रत व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाता है और भविष्य में आने वाले संकटों को दूर करने में सहायक होता है। इसलिए 2025 में सोम प्रदोष व्रत का पालन 17 नवंबर को करना ही सबसे सही और शास्त्रसम्मत माना गया है।