गुजरात दौरे के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के दौरान इतिहास, आस्था और राष्ट्रबोध का सशक्त संदेश दिया। समुद्र तट पर स्थित ज्योतिर्लिंग सोमनाथ में पूजा-अर्चना और शौर्य यात्रा में सहभागिता के साथ पीएम मोदी ने उन वीरों को नमन किया, जिन्होंने मंदिर की रक्षा में बलिदान दिया। उनका संबोधन सांस्कृतिक चेतना और सतर्क राष्ट्रनिर्माण की पुकार बनकर उभरा।
शौर्य यात्रा में वीरता का स्मरण
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के तहत आयोजित शौर्य यात्रा में 108 घोड़ों की प्रतीकात्मक सवारी शामिल रही, जो साहस और बलिदान का संदेश देती है। प्रधानमंत्री ने इसे उन असंख्य वीरों को सम्मान देने का अवसर बताया, जिन्होंने कठिन समय में आस्था की रक्षा की। उन्होंने कहा कि यह यात्रा केवल अतीत का स्मरण नहीं, बल्कि भविष्य के लिए प्रेरणा है।
इतिहास मिटाने की कोशिशें और पुनर्निर्माण का संकल्प
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज़ादी के बाद भी सोमनाथ के पुनर्निर्माण को लेकर बाधाएँ खड़ी की गईं। सरदार वल्लभभाई पटेल के संकल्प और प्रयासों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि कुछ शक्तियाँ तब भी विरोध में थीं और आज भी नए तरीकों से साजिशें रची जा रही हैं। ऐसे समय में देश को एकजुट और सजग रहने की आवश्यकता है।
आक्रांत इतिहास में सिमटे, सोमनाथ अडिग
पीएम मोदी ने कहा कि जिन्होंने सोमनाथ को नष्ट करने का प्रयास किया, वे इतिहास के पन्नों तक सीमित रह गए हैं। वहीं, सोमनाथ मंदिर आज भी समुद्र किनारे अपनी ऊंची ध्वजा के साथ भारत की सांस्कृतिक शक्ति का प्रतीक बनकर खड़ा है। यह मंदिर विनाश नहीं, विजय और पुनर्निमाण की कथा कहता है।
सनातन चेतना और ‘सोम’ का संदेश
प्रधानमंत्री ने सोमनाथ नाम के अर्थ की व्याख्या करते हुए कहा कि ‘सोम’ अमृत का प्रतीक है और यहां प्रतिष्ठित सदाशिव की चेतना कल्याण और शक्ति का स्रोत है। उन्होंने कहा कि तलवारों से आस्था को नहीं जीता जा सकता, क्योंकि सनातन चेतना समय के साथ और मजबूत होती है।
पूजा-अर्चना और श्रद्धांजलि का क्षण
स्वाभिमान पर्व के अवसर पर प्रधानमंत्री ने सोमनाथ मंदिर में जलाभिषेक किया और पुनर्निर्माण में अहम भूमिका निभाने वाले सरदार पटेल की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। उन्होंने इसे अपने लिए सौभाग्य का क्षण बताया और देशवासियों को आस्था, संस्कृति और एकता के सूत्र में बंधे रहने का आह्वान किया।