मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में रानी कमलापति रेलवे स्टेशन से ‘सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा’ का भव्य शुभारंभ हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हरी झंडी दिखाकर 1100 श्रद्धालुओं के पहले जत्थे को रवाना किया। इस यात्रा में 21 पवित्र नदियों का जल लेकर भक्त सोमनाथ मंदिर के लिए निकले हैं, जहां भगवान शिव का जलाभिषेक किया जाएगा। यह यात्रा आस्था, सांस्कृतिक गौरव और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बनकर सामने आई है।
भोपाल से भक्ति यात्रा की ऐतिहासिक शुरुआत
राजधानी भोपाल के रानी कमलापति रेलवे स्टेशन पर आयोजित कार्यक्रम में श्रद्धा और उत्साह का माहौल देखने को मिला। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दीप प्रज्वलित कर यात्रा की शुरुआत की और 21 नदियों के पवित्र जल कलशों का पूजन किया। इस अवसर पर उन्होंने श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दीं और इसे मध्य प्रदेश के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताया।
21 नदियों का पवित्र जल और 1100 श्रद्धालुओं का दल
इस विशेष यात्रा में प्रदेशभर से 1100 श्रद्धालु शामिल हुए हैं, जो दो कलशों में 21 नदियों का पवित्र जल लेकर रवाना हुए हैं। यह जल सोमनाथ मंदिर में भगवान शिव के अभिषेक के लिए उपयोग किया जाएगा। यात्रा में पुरुषों के साथ बड़ी संख्या में महिला श्रद्धालु भी शामिल हैं, जिससे यह आयोजन सामाजिक सहभागिता का भी उदाहरण बन गया है।
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व से जुड़ा सांस्कृतिक संदेश
यह यात्रा ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व 2026’ का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य भारत की सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रीय गौरव को मजबूत करना है। श्रद्धालु भोपाल और उज्जैन होते हुए आगे सोमनाथ मंदिर की ओर प्रस्थान करेंगे, जहां वे धार्मिक अनुष्ठानों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेंगे। यह यात्रा आस्था और परंपरा को जोड़ने का कार्य कर रही है।
सीएम मोहन यादव का संदेश और सनातन संस्कृति पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि सोमनाथ मंदिर भारत के स्वाभिमान और आस्था का प्रतीक है। उन्होंने सनातन संस्कृति की निरंतरता और विकास यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि आधुनिक भारत अपनी विरासत के साथ आगे बढ़ रहा है। उनके अनुसार धार्मिक स्थलों का विकास स्थानीय अर्थव्यवस्था और सामाजिक संरचना को भी मजबूत कर रहा है।
धार्मिक पर्यटन और आर्थिक बदलाव की नई दिशा
सरकार द्वारा धार्मिक स्थलों पर की जा रही विकास योजनाओं से पर्यटन को नई गति मिल रही है। महाकाल लोक जैसे प्रोजेक्ट्स ने उज्जैन में तीर्थयात्रियों की संख्या को कई गुना बढ़ा दिया है। इससे स्थानीय व्यापार, होटल, परिवहन और छोटे व्यवसायों को सीधा लाभ मिल रहा है, जिससे धार्मिक पर्यटन आर्थिक परिवर्तन का माध्यम बन रहा है।