राजा रघुवंशी हत्याकांड की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी के खिलाफ वाराणसी में आक्रोश फूट पड़ा। महिला संगठनों ने दशाश्वमेघ घाट पर सोनम का प्रतीकात्मक पिंडदान कर उसकी तस्वीर को आग के हवाले कर दिया। महिलाओं का कहना है कि सोनम जैसी महिला को समाज में स्थान नहीं मिलना चाहिए और उसे मोक्ष भी नहीं मिलना चाहिए। यह कदम महिलाओं की छवि को बचाने और सामाजिक संदेश देने के लिए उठाया गया है।
दशाश्वमेघ घाट पर सोनम का पिंडदान
वाराणसी के दशाश्वमेघ घाट पर महिला संगठनों ने विधिवत पूजन के साथ सोनम रघुवंशी का पिंडदान किया। आयोजन के दौरान राजा रघुवंशी की आत्मा की शांति के लिए भी प्रार्थना की गई। सोनम की तस्वीर को पहले जलाया गया और फिर उसे गंगा में प्रवाहित करने से इंकार कर दिया गया।
गुस्से में महिलाएं—न मोक्ष, न माफी
महिलाओं ने कहा कि सोनम जैसी महिला ने न सिर्फ अपने पति की हत्या की, बल्कि पूरे महिला समाज को कलंकित किया है। उनका कहना है कि इस घटना के बाद लोग विवाह जैसे पवित्र रिश्ते पर सवाल उठाने लगे हैं। इसलिए सोनम का सामाजिक बहिष्कार करते हुए उसे 'जिंदा मरने' जैसा दंड दिया गया है।
पुजारी की टिप्पणी—समाज से पूरी तरह कटाव का संकेत
पिंडदान कराने वाले पुजारी का कहना है कि किसी जीवित व्यक्ति का पिंडदान समाज द्वारा उसे पूरी तरह त्याग देने का प्रतीक है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह दर्शाना था कि अब समाज में उसका कोई स्थान नहीं है, और न ही उसे मोक्ष प्राप्त हो।
9 जून को गाजीपुर में मिली थी सोनम
राजा रघुवंशी की हत्या के बाद सोनम पहले इंदौर में छिपी रही, फिर गाजीपुर में पकड़ी गई। इस हाई प्रोफाइल हत्याकांड में कई आरोपी शिलांग जेल में बंद हैं और पुलिस की जांच जारी है। महिला संगठनों की यह कार्रवाई इस केस के सामाजिक प्रभाव को उजागर करती है।
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