शिक्षाविद सोनम वांगचुक ने अपनी भूख हड़ताल समाप्त करने के बाद वीडियो संदेश जारी कर फैसले के पीछे की वजह बताई। उन्होंने कहा कि उनके सामने दो विकल्प थे—अनशन जारी रखकर अपनी जान जोखिम में डालना या आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए जीवित रहना। उन्होंने स्पष्ट किया कि छात्रों के हित, शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई न होने का भरोसा और परीक्षा प्रणाली पर संसद में चर्चा उनके फैसले के प्रमुख कारण रहे।
अनशन खत्म करने के बाद साझा की पूरी बात
भूख हड़ताल समाप्त करने के बाद जारी वीडियो संदेश में सोनम वांगचुक ने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य केवल एक मांग तक सीमित नहीं था, बल्कि परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही और छात्रों के भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना था। उन्होंने कहा कि कई लोगों ने उन्हें स्वास्थ्य और जीवन को प्राथमिकता देने की सलाह दी, क्योंकि लंबी लड़ाई लड़ने के लिए उनका स्वस्थ रहना जरूरी है।
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर कही यह बात
वीडियो संदेश में सोनम वांगचुक ने कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर उन्हें किसी निश्चित समयसीमा का आश्वासन नहीं मिला। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि इस विषय पर संसद में चर्चा होने का भरोसा दिया गया है। उनके अनुसार, किसी व्यक्ति के इस्तीफे से अधिक महत्वपूर्ण परीक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करना और सुधार लागू करना है।
छात्रों पर कार्रवाई न होने को बताया सबसे बड़ी प्राथमिकता
सोनम वांगचुक ने कहा कि उनके लिए सबसे अहम मुद्दा यह था कि शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं के खिलाफ कोई मामला दर्ज न हो। उनका कहना था कि किसी भी छात्र का भविष्य कानूनी मामलों में उलझकर प्रभावित नहीं होना चाहिए। उन्होंने बताया कि इस संबंध में सकारात्मक आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने अपना अनशन समाप्त करने का निर्णय लिया।
परीक्षा सुधार और प्रभावित परिवारों पर भी हुई चर्चा
उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से यह भरोसा दिया गया है कि भारतीय संसद में परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता, जवाबदेही और सुधारों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। इसके साथ ही, पेपर लीक की घटनाओं से प्रभावित छात्रों के परिवारों से जुड़े मुद्दों पर भी संवेदनशीलता के साथ विचार करने का आश्वासन मिलने की बात उन्होंने कही।
आंदोलन जारी रखने का दिया संकेत
सोनम वांगचुक ने स्पष्ट किया कि भूख हड़ताल समाप्त होने का अर्थ आंदोलन का अंत नहीं है। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली में सुधार और छात्रों के हितों की रक्षा के लिए उनकी आवाज आगे भी उठती रहेगी। उनका मानना है कि स्थायी समाधान संवाद, जवाबदेही और प्रभावी सुधारों के माध्यम से ही संभव है।