उत्तर प्रदेश के औरैया जिले से पिछले साल इंसानियत को झकझोर देने वाली एक घटना सामने आई थी. एक साल पहले एक महिला ने अपने प्रेमी के लिए अपने ही तीन मासूम बच्चों को सेंगुर नदी में डुबोकर मार डाला था, जबकि चौथा बेटा किसी तरह जिंदा बच गया. अब उसी 8 साल के बेटे सोनू की गवाही के आधार पर कोर्ट ने मां को फांसी की सजा सुनाई है. इस मामले ने साबित कर दिया कि सच चाहे जितना भी छुपाया क्यों न जाए वह अपनी ताकत खुद बना लेता है. 8 साल के सोनू ने अपनी मां के खिलाफ गवाही देकर अपने छोटे भाइयों को इंसाफ दिलाया. यह एक ऐसा मामला है, जिसने लोगों को झकझोर दिया और दिखा दिया कि अपराध कितना भी छुपा हो, सच्चाई कभी हारती नहीं है.
क्या है पूरा मामला?
यह दर्दनाक घटना 27 जून 2024 को औरैया के फफूंद थाना क्षेत्र के बरौआ गांव में हुई थी. यहां की रहने वाली प्रियंका नाम की महिला ने अपने ही चार बेटों को सेंगुर नदी में डुबो दिया. इनमें से 6 साल के आदित्य, 4 साल के माधव और डेढ़ साल के मंगल की पानी में डूबने की वजह से मौत हो गई थी. लेकिन 8 साल के बड़े बेटे सोनू ने मृत होने का नाटक किया और किसी तरह अपनी जान बचा ली.
चौथे बेटे ने खोला मां का राज
सोनू ने जब खुद को संभाला तो उसने गांव के लोगों को पूरी घटना के बारे में बताया. उसकी बातों को शुरू में लोगों ने गंभीरता से नहीं लिया, लेकिन जांच आगे बढ़ी तो उसके बयान सच साबित हुए. इस मामले ने पूरे राज्य में सनसनी फैला दी थी.
प्रेमी के लिए बच्चों की बलि
जांच में सामने आया कि प्रियंका अपने चचेरे देवर आशीष के साथ प्रेम संबंध में थी. तीन साल पहले उसके पति अवनीश की करंट लगने से मौत हो गई थी. इसके बाद प्रियंका का रिश्ता आशीष से बन गया. लेकिन आशीष प्रियंका के चार बच्चों को अपनाने को तैयार नहीं था. इसी वजह से प्रियंका ने अपने ही बच्चों को रास्ते से हटाने का फैसला लिया.
एक साल की सुनवाई के बाद आया फैसला
करीब एक साल की सुनवाई के बाद औरैया की एडीजे-3 कोर्ट ने फैसला सुनाया. जहां मां प्रियंका को फांसी की सजा सुनाई गई, वहीं उसके प्रेमी आशीष को उम्र कैद और 1 लाख रुपये जुर्माने की सजा दी गई. सरकारी वकील अभिषेक मिश्रा ने बताया कि केस में कुल 7 गवाह पेश किए गए, जिनमें सबसे अहम गवाही सोनू की रही, जिसने सच को सामने लाकर रख दिया.