Stampede in West Bengal: पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) शुरू होते ही अवैध बांग्लादेशी नागरिकों में भारी घबराहट फैल गई है। कोलकाता की गुलशन कॉलोनी जैसे कई क्षेत्रों में जहां वर्षों से घुसपैठिए रह रहे थे, वहां अब घर खाली होने लगे हैं। कई अवैध बांग्लादेशी बिना किसी पहचान पत्र के लंबे समय से पश्चिम बंगाल में रह रहे थे, लेकिन जैसे ही मतदाता सूची के व्यापक सत्यापन की प्रक्रिया शुरू हुई, अचानक बड़ी संख्या में लोग बॉर्डर की ओर पलायन करने लगे। बॉर्डर पहुंच रहे कई बांग्लादेशी BSF से अपने देश वापस भेजने की गुहार लगा रहे हैं। बताया जा रहा है कि ये लोग भारत में 5 से 15 साल तक बिना वैध दस्तावेज के खुले तौर पर रह रहे थे, लेकिन SIR के बाद अब पकड़े जाने का डर उन्हें वतन लौटने पर मजबूर कर रहा है।
जांच कड़ी हुई तो बढ़ा डर
BSF के अनुसार सिर्फ एक हफ्ते में 1,720 बांग्लादेशी नागरिकों को वापस भेजा गया है। इन सभी को साउथ बंगाल फ्रंटियर की कार्रवाई के तहत हकीमपुर चेकपोस्ट से बांग्लादेश(border guards) को सौंपा गया। SIR लागू होने के बाद हर संदिग्ध नागरिक की बायोमेट्रिक पहचान, दस्तावेज सत्यापन और आपराधिक पृष्ठभूमि की जांच की जा रही है।
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क्यों डरे घुसपैठिए?
कई बांग्लादेशियों ने कबूला है कि उन्होंने भारत में कोई पहचान पत्र नहीं बनवाया था। अब SIR के दौरान दस्तावेज जांच अनिवार्य होने से उन्हें लग रहा है कि पहचान उजागर होते ही वे कानूनी कार्रवाई में फंस जाएंगे। एक घुसपैठिए ने बताया, “सरकार ने साफ कर दिया कि हम जैसे लोग नहीं चाहिए।” यही वजह है कि वे तेजी से पश्चिम बंगाल छोड़ रहे हैं।